बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू) के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले मंगलवार को नगर पालिका गेट पर नगर निकाय कर्मियों और मजदूरों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अधिकारियों के माध्यम से राज्य सरकार को संबोधित एक मांग पत्र सौंपा। यूनियन के राज्य सचिव अमित कुमार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार वर्षों से नगर निकाय कर्मियों, दैनिक वेतनभोगी, संविदा, आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मियों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याएं समय-समय पर सरकार और विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाई गईं, कई दौर की वार्ताएं भी हुईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
अमित कुमार ने बताया कि आज तक किसी भी प्रमुख मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष और निराशा है। मजदूरों के आर्थिक शोषण का लगाया आरोप उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न मामलों में माननीय उच्च न्यायालय ने भी सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए संवाद स्थापित करने और उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद अब तक कोई सार्थक पहल नहीं हुई है। अमित कुमार ने आरोप लगाया कि ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण मजदूरों का आर्थिक शोषण हो रहा है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार और बिचौलिया प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है। नगर निकाय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग यूनियन नेताओं ने अपनी मांगों में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मियों, संविदा कर्मियों और अन्य अस्थायी कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने नगर निकायों में लागू ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर संबंधित कर्मियों को नगर निकाय कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग की। इसके अलावा, राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह नगर निकाय कर्मियों को भी एसीपी/एमएसीपी योजना का लाभ देते हुए सभी बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की गई। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि 29 जुलाई 2026 तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्य के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के कर्मचारी 30 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

