Thursday, July 2, 2026

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नया टेंडर देने के लिए सर्टिफिकेट का खेल:जिस एजेंसी को विफलता पर शोकॉज, उसे दिया संतोषजनक काम का सर्टिफिकेट


रांची सदर अस्पताल को एंटी रैबीज वैक्सीन सप्लाई में विफल रही वीके ड्रग्स एंड कंपनी, रांची सदर अस्पताल में टेंडर के लिए कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। वीके ड्रग्स एंड कंपनी नामक जिस एजेंसी ने सिर्फ 20 प्रतिशत एंटी रैबीज वैक्सीन की सप्लाई की, उस पर कार्रवाई की बजाय अस्पताल प्रबंधन ने विशेष ​मेहरबानी दिखाई। दो बार नोटिस, फिर शोकॉज के 17 दिन बाद सिविल सर्जन (सीएस) ने उसी एजेंसी को संतोषजनक कार्य एवं आचरण का अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया। बाद में इसी सर्टि​फिकेट के आधार पर अन्य दवा की आपूर्ति के लिए फिर उसी एजेंसी का चयन कर लिया। इस प्रमाण पत्र के लिए स्टोर इंचार्ज अनिल कुमार ने सिविल सर्जन को फाइल भेजी थी। भास्कर ने जब स्टोर इंचार्ज से बात की तो उन्होंने कहा कि उपाधीक्षक (डीएस) से बात हुई ​थी। चूंकि कंपनी ने पहले भी दवाओं की नियमित सप्लाई की थी, इसलिए उपाधीक्षक ने कहा कि कंपनी को सर्टिफिकेट दिया जा सकता है। वहीं उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह ने इससे इनकार ​कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया में कहीं उनका कोई रोल नहीं है। वहीं सिविल सर्जन ने पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को आधार बताते हुए अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की बात कही।
गौरतलब है कि एजेंसी को ई-टेंडर के माध्यम से 31 हजार वायल एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। लेकिन ढाई माह बाद भी उसने सिर्फ 3200 वायल की ही आपूर्ति की। इसका सीधा असर अस्पताल आने वाले डॉग बाइट पीड़ितों पर पड़ा। अस्पताल प्रबंधन को दूसरी कंपनी से वैक्सीन खरीदकर मरीजों को देनी पड़ी। स्टोर इंचार्ज ने कहा- डीएस के कहने पर फाइल बढ़ाई थी, डीएस बोले-मुझे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं
जानिए…कब-कब भेजा नोटिस, कब दिया क्लीन चिट
16 मार्च 2026 : सिविल सर्जन ने पत्र जारी कर दो दिन के भीतर वैक्सीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। स्पष्ट चेतावनी दी कि आदेश का पालन नहीं होने पर निविदा शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
25 अप्रैल 2026 : सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने दोबारा पत्र जारी कर तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। पत्र में लिखा कि वैक्सीन की नियमित सप्लाई नही होने से मरीजों पर असर पड़ता है। सरकार की छवि भी धूमिल होती है। किस परिस्थिति में दवा की आपूर्ति नहीं की जा रही, इसे स्पष्ट करें। टेंडर शर्तों के अनुसार सप्लाई नही होने पर कार्रवाई की जाएगी। 12 मई 2026 : सिविल सर्जन ने शो-कॉज कर पूछा कि आखिर निविदा शर्तों का उल्लंघन करने पर एजेंसी केों खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। 25 हजार वायल के आदेश के विरुद्ध अब तक करीब 3200 वायल ही उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे अस्पताल में मरीजों को वैक्सीन उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।
29 मई 2026 : एजेंसी को कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसमें एजेंसी के काम और आचरण को संतोषजनक बताया गया। यानी एक ओर फाइलों में निविदा शर्तों के उल्लंघन की बात दर्ज है, वहीं उसी अ​वधि के लिए उत्कृष्ट काम का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। फिर इसी अनुभव प्रमाण पत्र पर ई-टेंडर में उसी एजेंसी को सदर अस्पताल में दूसरी दवा की आपूर्ति का जिम्मा दे दिया। पहले के काम के आधार पर दिया सर्टिफिकेट
आपने जिस एजेंसी को शोकॉज किया, बाद में उसे ही कार्य अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया?
-वीके ड्रग्स ने इस बार सप्लाई पूरी नहीं की थी। इसलिए कई बार नोटिस और शोकॉज किया गया था। लेकिन जहां तक कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की बात है तो उसे पहले के काम के आधार पर सर्टिफिकेट जारी किया गया है। पहले एजेंसी ने नियमित रूप से दवा की सप्लाई की थी।
एजेंसी ने सप्लाई न होने का क्या कारण बताया था?
-अमेरिका-ईरान जंग के कारण कई चीजें प्रभावित थीं। ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग आदि के रेट भी बढ़ गए थे। चूंकि टेंडर उससे पहले हुए थे। कंपनी ने बताया था कि दवा की सप्लाई ऊपर से ही प्रभावित है। रेट बढ़ने की बात भी कही थी।

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