Thursday, July 2, 2026

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डॉक्टर का व्हाट्सएप हैक, परिचित से 40 हजार की ठगी:गोपालगंज में ब्लू डार्ट एजेंट बनकर किया संपर्क, अपराधियों के खिलाफ FIR दर्ज


गोपालगंज सदर अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके परिचितों से मदद के नाम पर रुपये मांगने शुरू कर दिए। डॉक्टर के एक परिचित ने झांसे में आकर ठगों द्वारा बताए गए यूपीआई आईडी पर 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। मामले को लेकर पीड़ित चिकित्सक ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर शुरू की ठगी थाने में दिए गए आवेदन के अनुसार, साइबर अपराधियों ने सबसे पहले डॉ. संतोष कुमार का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर की प्रोफाइल फोटो और नंबर का इस्तेमाल करते हुए उनके परिचितों, दोस्तों और सहकर्मियों को संदेश भेजना शुरू कर दिया। मैसेज में किसी आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए तत्काल आर्थिक मदद मांगी गई। डॉक्टर का नंबर और प्रोफाइल देखकर कई लोगों को यह संदेश वास्तविक लगा। परिचित ने भेज दिए 40 हजार रुपये साइबर ठगों के भेजे गए संदेश पर भरोसा करते हुए डॉक्टर के एक परिचित ने मदद के उद्देश्य से अपराधियों द्वारा दिए गए यूपीआई खाते में 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब वास्तविकता सामने आई, तब पता चला कि रकम साइबर अपराधियों के खाते में चली गई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति भी हैरान रह गया और उसने तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। ब्लू डार्ट एजेंट बनकर फिर किया संपर्क ठगी की घटना यहीं नहीं रुकी। पीड़ित डॉक्टर के अनुसार, साइबर अपराधियों ने बाद में उनसे सीधे संपर्क किया। इस बार उन्होंने खुद को एक कूरियर कंपनी का एजेंट बताया। डॉक्टर ने बताया कि ठगों ने खुद को Blue Dart Express का एजेंट बताते हुए किसी पार्सल डिलीवरी का हवाला दिया और विभिन्न बहानों से फिर से पैसों की मांग करने लगे। इसी दौरान डॉक्टर को अपने व्हाट्सएप अकाउंट के हैक होने और उनके नाम पर की जा रही ठगी की जानकारी मिली। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलने के बाद डॉ. संतोष कुमार ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की मदद से ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए यूपीआई आईडी, बैंक खाते और तकनीकी जानकारियों की जांच की जा रही है। साथ ही अपराधियों के आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को ट्रैक करने का प्रयास किया जा रहा है। सोशल मीडिया सुरक्षा पर फिर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों के व्हाट्सएप और सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर उनके परिचितों को निशाना बना रहे हैं। अक्सर लोग परिचित व्यक्ति का नाम और फोटो देखकर बिना पुष्टि किए पैसे भेज देते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं।

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