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प्रेमी संग मिलकर दो मासूम बच्चों की हत्या, मां और प्रेमी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

प्रेमी संग मिलकर दो मासूम बच्चों की हत्या, मां और प्रेमी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

मधुबनी से रमन मिश्रा की रिपोर्ट

Madhubani Death Penalty: चार साल के बेटे और 18 माह की बेटी की हत्या के मामले में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया. जिला अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन की अदालत ने मां अनीता देवी और उसके प्रेमी जयशंकर मंडल को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का माना.

दोनों दोषियों पर अलग-अलग 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

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हत्या के बाद नदी में फेंक दिए थे शव

अभियोजन के अनुसार घटना जुलाई 2023 की है.

अंधरामठ थाना क्षेत्र के नरही निवासी प्रमोद कुमार साफी की पत्नी अनीता देवी 3 जुलाई 2023 को अपने चार वर्षीय बेटे प्रिंस और 18 माह की बेटी सृष्टि को लेकर घर से निकली थी. शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की.

जांच में आरोप सामने आया कि अनीता देवी ने अपने प्रेमी जयशंकर मंडल के साथ मिलकर दोनों बच्चों की हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव बलान नदी में फेंक दिए.

बाद में चार वर्षीय प्रिंस का शव बरामद हुआ, जबकि 18 माह की सृष्टि का शव नदी की तेज धारा में बह गया था.

ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था.

मृतक बच्चों के पिता प्रमोद कुमार साफी के आवेदन पर घोघरडीहा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. दोनों आरोपी 11 जुलाई 2023 से न्यायिक हिरासत में हैं.

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अदालत ने क्या सुनाया फैसला?

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई.

इसके अलावा धारा 201/34 के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई गई. अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

अभियोजन ने मांगी थी फांसी

सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक देव शंकर झा ने अदालत से इसे समाज के लिए नजीर बताते हुए फांसी की सजा देने की मांग की थी.

वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिवचंद्र कुमार और बालेश्वर मंडल ने कम सजा देने का अनुरोध किया था.

झंझारपुर कोर्ट का पहला फैसला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, झंझारपुर अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का यह पहला मामला है, जिसमें किसी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई है.

अदालत ने अपने फैसले में इस दोहरे हत्याकांड को मानवता के विरुद्ध ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का अपराध माना.

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