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सहरसा सदर अस्पताल में जन्मजात टेढ़े पैर (क्लबफुट) से पीड़ित बच्चों के लिए निःशुल्क इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार और अनुष्का फाउंडेशन के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन(एमओयू)के बाद अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में क्लबफुट क्लिनिक का संचालन आरंभ हुआ है। सिविल सर्जन डॉ राज नारायण प्रसाद ने बताया कि इस क्लिनिक में सप्ताह में दो दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्चों का मुफ्त उपचार किया जाएगा। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. राजेश रंजन ने दो बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार कर इस सेवा की शुरुआत की। जो ऑपरेशन सफल रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिला सदर अस्पतालों में ऐसे क्लबफुट क्लिनिक स्थापित किए जा रहे हैं। अस्पताल में क्लबफुट से पीड़ित बच्चों का उपचार विश्वस्तरीय पोंसेटी मेथड (Ponseti Method) से किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल के ऑर्थोपेडिक चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके। इलाज के साथ-साथ बच्चों के अभिभावकों को बीमारी, उपचार प्रक्रिया और आगे की देखभाल की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित काउंसलर की व्यवस्था की गई है। उपचार के दौरान आवश्यक फुट एब्डक्शन ब्रेस (FAB) अनुष्का फाउंडेशन की ओर से पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल में कास्टिंग सामग्री की कमी होने पर उसकी व्यवस्था भी फाउंडेशन द्वारा की जाएगी। क्लबफुट की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और आरबीएसके टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ.राज नारायण प्रसाद ने बताया कि यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और मुफ्त इलाज मिलने से क्लबफुट से पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन जी सकेंगे और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। डीईआईसी डॉ. अमृता ने भी जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या का प्रभावी उपचार समय रहते संभव होने की बात कही।सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि सदर अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में क्लबफुट से पीड़ित बच्चों का इलाज दवा, प्लास्टर, विशेष ब्रेस और आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेशन के माध्यम से किया जाएगा,ताकि उनके पैर सामान्य स्थिति में लाए जा सकें।

