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हजारीबाग जिले में जंगली मशरूम खाने से दो से तीन परिवारों के दर्जनों लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए हैं। सभी बीमारों का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित विभिन्न निजी अस्पतालों में चल रहा है। यह घटना ईचाक प्रखंड के देवकुली, बरका खुर्द और आसपास के गांवों में हुई। ग्रामीणों ने जंगल से जंगली मशरूम, जिसे स्थानीय भाषा में खुखड़ी कहा जाता है, लाकर उसकी सब्जी बनाई थी। भोजन के कुछ ही देर बाद परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई लोगों को उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, चक्कर और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हुए। स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने सभी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंच जाने से मरीजों की स्थिति नियंत्रण में है। घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी अमरीश पांडे ने लोगों से अपील की है कि जंगल से लाए गए किसी भी मशरूम का सेवन उसकी सही पहचान किए बिना न करें। उन्होंने बताया कि विषैले मशरूम का प्रभाव कई बार दो से तीन घंटे के भीतर दिखाई देता है, जबकि कुछ मामलों में इसके लक्षण दो से तीन दिन बाद भी सामने आ सकते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों से बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि केवल देखने या पारंपरिक जानकारी के आधार पर मशरूम की पहचान करना सुरक्षित नहीं है। यदि मशरूम खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
