
खास बातें
TMC Split Crisis: असली तृणमूल कांग्रेस और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर की कानूनी जंग अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर है. चुनाव आयोग (ECI) की डेडलाइन सोमवार (6 जुलाई) शाम 5:30 बजे समाप्त हो रही है. इस तय समय तक ममता बनर्जी गुट (Mamata Banerjee Faction) और रीतब्रत बनर्जी गुट (Ritabrata Banerjee Faction) दोनों को ही पार्टी पर अपने-अपने अधिकारों और दावों के समर्थन में संगठनात्मक व विधायी बहुमत से जुड़े सभी लिखित पक्ष और दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने हैं.
ममता का पक्ष हो गया ध्वस्त : रीतब्रत
दस्तावेज जमा करने की समयसीमा खत्म होने से पहले तृणमूल में मची भगदड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गयी है. विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत (58 विधायकों) का दावा करने वाले रीतब्रत बनर्जी गुट का कहना है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से ममता गुट का पक्ष चुनाव आयोग के सामने पूरी तरह ध्वस्त हो गया है.
‘अब कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में नहीं रहना चाहता’
रीतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा- अब कोई भी इस ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ में रहना नहीं चाहता है. इंटाली के बागी विधायक संदीपन साहा ने याद दिलाया कि पहले महिला संगठन की अध्यक्ष माला रॉय टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुईं. अब प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा ने भी साथ छोड़ दिया. जिस समिति का स्वरूप ही हर हफ्ते बदल रहा है, चुनाव आयोग उसकी वैधता को कैसे स्वीकार करेगा?
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ममता गुट का पलटवार- चंद्रिमा अधिकृत प्रतिनिधि थीं ही नहीं
ममता बनर्जी के वफादार खेमे ने अपने दावे को कानूनी रूप से फुलप्रूफ बताया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा- किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे से पार्टी नहीं रुकती. हमें देश के कानून और चुनाव आयोग पर पूरा भरोसा है.
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TMC Split Crisis: ‘चंद्रिमा के इस्तीफे का नहीं होगा कोई असर’
ममता बनर्जी गुट के रणनीतिकारों के अनुसार, चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे से चुनाव आयोग में उनके केस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि पार्टी चीफ ने 15 जून को ही चुनाव आयोग को पत्र भेजकर केवल अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओब्रायन को ही पार्टी का अधिकृत प्रतिनिधि बनाया था. इसमें चंद्रिमा का नाम शामिल ही नहीं था. 22 जून को आयोग को भेजी गयी राष्ट्रीय कार्यसमिति की अंतिम सूची में चंद्रिमा केवल साधारण सदस्य थीं. बागी हो चुकीं सायोनी घोष, माला रॉय या ज्योतिप्रिय मल्लिक का नाम उस लिस्ट में था ही नहीं.
20 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी दे सकते हैं फैसला
तृणमूल कांग्रेस के इस महा-संकट के बीच एक और तारीख सामने आ रही है. 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल के 20 बागी सांसदों के दल-बदल (Defection) मामले पर अपना अंतिम फैसला सुना सकते हैं.
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