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गोपालगंज के सदर प्रखंड कार्यालय में रखी दिव्यांगों के लिए खरीदी गईं ट्राईसाइकिलें प्रशासनिक लापरवाही के कारण खराब हो रही हैं। वितरण न होने के कारण इन ट्राईसाइकिलों में जंग लग गई है और ये घास-फूस से ढक चुकी हैं। यह स्थिति सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में संवेदनहीनता को उजागर करती है। केंद्र सरकार की एडिप योजना के तहत दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आवागमन को सुगम करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में लाखों रुपये की लागत से 23 नई ट्राईसाइकिलें खरीदी गई थीं। हालांकि, विभागीय लापरवाही के कारण आज तक इनका वितरण नहीं हो सका और इन्हें कबाड़ की तरह छोड़ दिया गया है। यदि समय रहते इन ट्राईसाइकिलों का वितरण जरूरतमंद लाभार्थियों के बीच कर दिया जाता, तो कई दिव्यांग स्वावलंबन के साथ अपनी आजीविका कमा रहे होते। जनता के टैक्स के पैसे से खरीदी गई ये सामग्रियां अधिकारियों की सुस्ती के कारण बेकार पड़ी हैं, जिससे सरकारी धन का सीधा नुकसान हो रहा है। लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति कबाड़ हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद संबंधित विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। बताया गया है कि वितरण कार्यक्रम के दौरान कुछ लाभार्थी नहीं पहुंच सके थे, जिसके बाद ट्राईसाइकिलों को ब्लॉक परिसर में सुरक्षित रख दिया गया था। हालांकि, बाद में इन्हें वितरित करने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई। नतीजतन, लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति वर्षों से बेकार पड़ी है और उसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। मामले की जांच कराई जाएगी-सांसद सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने कहा कि सांसद बनने के बाद उन्होंने चार बार दिव्यांगजनों के बीच ट्राई साइकिल और अन्य सहायक उपकरणों का वितरण कराया है। कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि वितरण से बची ट्राई साइकिलें गोपालगंज और फुलवरिया प्रखंड में वर्षों से पड़ी हैं और उनकी हालत खराब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जिला पदाधिकारी से जांच कराई जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सांसद ने कहा कि यह भारत सरकार के धन की बर्बादी है और इससे दिव्यांग लाभार्थियों का अधिकार भी प्रभावित हुआ है।

