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भास्कर न्यूज|गुमला समाहरणालय सभागार में शनिवार को ‘जीवन परियोजना’ की एक वर्ष की प्रगति और आधारभूत सर्वेक्षण प्रतिवेदन पर समीक्षा बैठक हुई। अध्यक्षता उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने की। इसमें उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन और सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी भी शामिल हुए। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने परियोजना के तहत पिछले एक साल में हुई गतिविधियों, उनके प्रभाव और सर्वेक्षण निष्कर्षों की समीक्षा की। बताया गया कि यह परियोजना राज्य सरकार से अनुमोदित है और टाटा ट्रस्ट के सहयोग से जुलाई 2025 से जिले में चल रही है। इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार करना है। बैठक में द जॉर्ज इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार आधारभूत सर्वेक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों ने अगले चरण में विभागीय समन्वय मजबूत करने और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए एकजुट संस्था की भूमिका महत्वपूर्ण है। बैठक में यह भी बताया गया कि संस्था के सहयोग से पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों के नामांकन में वृद्धि हुई है। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि परियोजना के लक्ष्यों के लिए नियमित निगरानी और आपसी समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हो सके।
