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मुंगेर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार से इसमें प्रति घंटे लगभग 2 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे पहले शनिवार को जलस्तर में आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की बढ़ोतरी हुई थी। पिछले कुछ दिनों में गंगा का जलस्तर करीब दो मीटर तक बढ़ चुका है। बढ़ते जलस्तर का असर अब नगर निगम क्षेत्र के सभी 12 गंगा घाटों पर दिखने लगा है, जहां पानी सीढ़ियों तक पहुंच गया है। वहीं, ग्रामीण इलाकों के निचले क्षेत्रों में भी गंगा का पानी प्रवेश करना शुरू हो गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने दियारा और कटाव प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। कटाव की स्थिति का जायजा लिया गया
8 जुलाई को जिलाधिकारी निखिल धनराज निपाणिकर ने मोहली पंचायत के आदर्श ग्राम टीकारामपुर का दौरा किया और कटाव की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को कटाव रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल ने विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर तैयारी शुरू कर दी है। सदर प्रखंड के चंडिका स्थान टीकारामपुर, जमालपुर प्रखंड के पड़हम और बरियारपुर के घोरघट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बालू से भरे सीमेंट के बैग तैयार कर उनका स्टॉक किया जा रहा है। इनका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर बाढ़ बचाव कार्यों में किया जाएगा। सीमेंट के बोरों में बालू भरकर रखा जा रहा
हालांकि, टीकारामपुर घाट पर अभी तक व्यापक कटावरोधी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सोमवार को गांव के पूर्वी हिस्से में सीमित स्तर पर कार्य प्रारंभ किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्लास्टिक और साधारण सीमेंट के बोरों में बालू भरकर रखा जा रहा है, जो जल्द ही खराब हो सकता है और कटाव रोकने में प्रभावी साबित नहीं होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर कार्यों की जांच कराने की मांग की है। गांव के पश्चिमी हिस्से में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है। यहां आधे किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में किसानों की कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है और कटाव लगातार जारी है। कई खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे अगले कुछ दिनों में और जमीन नदी में समाने की आशंका बढ़ गई है। खतरे को देखते हुए किसान अपनी फसल और मवेशियों के चारे को खेतों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। गोताखोर या आपदा मित्रों की तैनाती नहीं की गई
इधर बढ़ते जलस्तर के बावजूद गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अभी तक किसी भी घाट पर गोताखोर या आपदा मित्रों की तैनाती नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के साथ दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है, ऐसे में प्रशासन को घाटों पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मुंगेर-भागलपुर के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि कटाव और बाढ़ से निपटने के लिए विभाग विभिन्न स्थानों पर खाली सीमेंट बैग तैयार कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इन बैगों का उपयोग फ्लड फाइटिंग और कटावरोधी कार्यों में किया जाएगा। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


