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शिवहर में बागमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण निर्माणाधीन मुक्तिधाम का पूर्वी हिस्सा नदी में समा गया है। शिवहर के ऐतिहासिक बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम के डूबा घाट पर बुडको द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से यह श्मशान घाट बनाया जा रहा था। नदी के तेज कटाव से इसके कई पिलर और संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण परियोजना पर संकट गहरा गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया जा रहा है कि बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। हालांकि, पानी का बहाव सामान्य दिख रहा था, लेकिन नदी की धारा लगातार निर्माण स्थल पर दबाव बना रही थी। इसी दबाव के कारण कटाव इतना तेज हुआ कि मुक्तिधाम का पूर्वी भाग नदी में बह गया। इसे इस वर्ष बागमती नदी का पहला बड़ा कटाव माना जा रहा है। डूबा घाट शिवहर जिले का एक प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल है। यहां शिवहर शहर के साथ-साथ लक्ष्मीपुर, रसीदपुर, कमरौली, परसौनी बैज, हरिहरपुर और देकुली धाम सहित कई गांवों के लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। पूर्वी भाग के क्षतिग्रस्त होने से स्थिति गंभीर पहले से ही पश्चिमी हिस्से में नदी के कटाव से लोगों को परेशानी हो रही थी, अब पूर्वी भाग के क्षतिग्रस्त होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नदी से बचाव के लिए ठोस सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो करोड़ों रुपये की इस परियोजना को नुकसान से बचाया जा सकता था। इस घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी सर्वेक्षण और नदी के स्वभाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों ने प्रशासन और बुडको से मांग की है कि तत्काल स्थल का निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कटाव रोकने के लिए युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक कार्य कराने की अपील की है, ताकि शेष निर्माण को बचाया जा सके और भविष्य में यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना पूरी तरह नदी में समाने से बच सके।

