Thursday, July 16, 2026

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नवजात बच्ची को फूलों से सजी एंबुलेंस से पहुंचाया घर:बेगूसराय में शख्स के घर 5 बेटों के बाद बेटी का जन्म, पिता बोला- 'लक्ष्मी' की जिद थी


बेटियों को लेकर समाज की सोच बदल रही है और इसकी एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली तस्वीर बेगूसराय जिले से सामने आई है। जहां आमतौर पर लोग बेटों के जन्म पर जश्न मनाते हैं, वहीं बेगूसराय के बछवाड़ा प्रखंड अंतर्गत रुदौली गांव में एक बेटी के जन्म पर ऐसा ऐतिहासिक जश्न मनाया गया। जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। यहां पांच बेटों के बाद जब एक नन्हीं परी ने जन्म लिया, तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस खुशी को यादगार बनाने के लिए अस्पताल से घर तक बेटी का स्वागत किसी राजकुमारी की तरह किया गया। सबसे पहले 3 तस्वीरें देखिए डोली की तरह सजी सरकारी एंबुलेंस मंगलवार को बछवाड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से एक बेहद अनोखी विदाई देखने को मिली। रुदौली गांव के रहने वाले रामउदित सहनी के परिवार में इस नन्हीं बच्ची का जन्म हुआ था। जब मां रूबी देवी और नवजात बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो परिवार ने घर ले जाने वाली सरकारी एंबुलेंस को फूलों और गुब्बारों से किसी डोली की तरह सजवा दिया। इतना ही नहीं, एंबुलेंस के आगे-आगे एक बड़ा डीजे साउंड सिस्टम लगाया गया था। अस्पताल के गेट से लेकर गांव के घर तक, पूरे रास्ते डीजे पर धमाकेदार और मांगलिक गीत बजते रहे। रास्ते में जो कोई भी इस नजारे को देख रहा था, वह ठहरकर मुस्कुरा रहा था। बेटी के स्वागत में पूरा परिवार और ग्रामीण एंबुलेंस के आगे चल रहे थे। 5 भाइयों पर एक अकेली बहन अस्पताल के अंदर एंबुलेंस में बैठी बच्ची की बुजुर्ग दादी उषा देवी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उन्होंने भावुक होते हुए बताया, “हमारे घर में खुशी का कोई पार नहीं है। पांच भाइयों पर यह एक अकेली बहन पैदा हुई है। हमारे दो बेटे हैं (रामउदित सहनी और उनके भाई), बड़े बेटे के तीन लड़के हैं और छोटे बेटे के दो लड़के थे। पूरे परिवार में एक भी बेटी नहीं थी। हम लोग बरसों से एक बेटी के तरस रहे थे। आज हमारे घर में साक्षात लक्ष्मी आई है, इसीलिए हम लोग यह जश्न मना रहे हैं पति की भी यही जिद थी कि बेटी हो नवजात बच्ची की मां रूबी देवी ने घूंघट की ओट से अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मां बनने के नाते मुझे बेहद खुशी है, लेकिन मुझसे ज्यादा खुशी इस बच्ची के पापा को है। उनकी बहुत इच्छा थी कि हमारे घर में एक बेटी का जन्म हो। पूरे परिवार में कोई लड़की नहीं थी, इसलिए आज हमारी खुशी दोगुनी हो गई है। हम सब मिलकर अपनी इस लाडली का स्वागत कर रहे हैं। परिवार ने बताया कि उन्होंने प्यार से अपनी इस लाडली का नाम रचना रखने का सोचा है। समाज को दिया सकारात्मक संदेश ग्रामीणों ने बताया कि रामउदित सहनी के परिवार ने इस जश्न के जरिए समाज में फैले बेटा-बेटी के भेदभाव को पूरी तरह से नकार दिया है। ग्रामीण युवक पंकज ने बताया, “पूरे परिवार और गांव के लिए यह बेहद गौरव का क्षण है। पांच भाइयों के बाद एक बहन का आना हमारे लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। इसीलिए हमने विशेष रूप से डीजे मंगवाया और धूमधाम से अपनी बहन को घर लेकर जा रहे हैं। बेगूसराय की यह अनोखी और खूबसूरत कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि घर की रौनक और साक्षात लक्ष्मी का रूप होती हैं। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी विदाई का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है और लोग इस सहनी परिवार की सोच की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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