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भागलपुर में बिहार के इकलौते गरुड़ पुनर्वास केंद्र का हो रहा कायाकल्प, घायल पक्षियों को मिलेगा और सुरक्षित ठिकाना

भागलपुर में बिहार के इकलौते गरुड़ पुनर्वास केंद्र का हो रहा कायाकल्प, घायल पक्षियों को मिलेगा और सुरक्षित ठिकाना

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur Garuda Rehabilitation Centre: बिहार के वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भागलपुर से एक अहम खबर सामने आई है. भागलपुर वन विभाग परिसर स्थित राज्य के एकमात्र गरुड़ पुनर्वास केंद्र का नवीकरण शुरू हो गया है. वन विभाग केंद्र की पुरानी जाली और बांस से बनी चारदीवारी को बदलकर नया ढांचा तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य घायल गरुड़ों के लिए अधिक सुरक्षित और बेहतर पुनर्वास व्यवस्था उपलब्ध कराना है.

वन विभाग का कहना है कि वर्षों पुरानी लकड़ी और बांस की संरचना लगातार बारिश और मौसम के प्रभाव से कमजोर हो चुकी थी. ऐसे में केंद्र की सुरक्षा और मजबूती बनाए रखने के लिए इसका रेनोवेशन जरूरी हो गया था.

क्यों खास है भागलपुर का यह पुनर्वास केंद्र

भागलपुर का यह गरुड़ पुनर्वास केंद्र पूरे बिहार में अपनी तरह का अकेला केंद्र है. यहां घायल, कमजोर या दुर्घटना में घायल हुए गरुड़ों को लाकर उनका इलाज किया जाता है.

वन विभाग की टीम और चिकित्सक मिलकर इन पक्षियों की नियमित निगरानी करते हैं. जब तक गरुड़ पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, उन्हें इसी केंद्र में रखा जाता है. उनके भोजन, उपचार और देखभाल की पूरी व्यवस्था वन विभाग की ओर से की जाती है.

स्वस्थ होने के बाद फिर लौटते हैं प्राकृतिक आवास में

इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां गरुड़ों को स्थायी रूप से नहीं रखा जाता.

इलाज और पुनर्वास पूरा होने के बाद जब पक्षी पूरी तरह उड़ने और शिकार करने में सक्षम हो जाते हैं, तब उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाता है. इससे वे अपने झुंड के साथ फिर से सामान्य जीवन जी सकें और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बने रहें.

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पुनर्वास की यही प्रक्रिया किसी भी पक्षी संरक्षण कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है.

Bhagalpur Garuda Rehabilitation Centre: पुरानी संरचना क्यों बदलनी पड़ी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार केंद्र की जाली, लकड़ी और बांस से बना ढांचा काफी पुराना हो चुका था. लगातार बारिश और नमी के कारण लकड़ी खराब होने लगी थी. इससे केंद्र की सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो रही थी.

इसी को देखते हुए पुरानी जाली हटाकर नई जाली लगाई जा रही है. साथ ही बांस की चारदीवारी को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, ताकि पुनर्वास केंद्र लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बना रहे.

वन विभाग ने दी जानकारी

भागलपुर के वन प्रमंडल पदाधिकारी आशुतोष राज ने बताया कि बिहार के एकमात्र गरुड़ पुनर्वास केंद्र का नवीकरण कराया जा रहा है. केंद्र की पुरानी जाली बदली जा रही है और बांस से बनी चारदीवारी को भी नया किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य घायल गरुड़ों के लिए बेहतर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि उनके उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया और प्रभावी ढंग से संचालित की जा सके.

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वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अहम पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पुनर्वास केंद्र जैव विविधता संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. घायल पक्षियों का समय पर इलाज और सुरक्षित पुनर्वास न केवल उनकी जान बचाता है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित बनाए रखने में मदद करता है.

भागलपुर में चल रहा यह नवीकरण कार्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. उम्मीद है कि नया ढांचा तैयार होने के बाद यहां घायल गरुड़ों की देखभाल पहले से अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी.

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