Saturday, July 18, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

झारखंड के सीताराम पहली हाइड्रोजन ट्रेन प्रोजेक्ट का हिस्सा:रेलवे में इंजीनियर रहते वंदे भारत समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़े


देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिल चुकी है। शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया। वैसे तो यह पूरा प्रोजेक्ट ही खास है पर झारखंड के लिए भी यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रहा है। इसकी वजह यह है कि इसे कल्पना से धरातल तक पहुंचाने वाली टीम में झारखंड की भी भागीदारी है। इस प्रोजेक्ट में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझगांव प्रखंड के खैरपाल गड़ासाई निवासी सीताराम सिंकू की अहम भूमिका रही है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे कोल्हान और झारखंड का गौरव बढ़ा है। वर्तमान में वे रेलवे बोर्ड की प्रोडक्शन यूनिट में अपर सदस्य के पद पर कार्यरत हैं। इस जिम्मेदारी के साथ वे रेलवे के आधुनिकीकरण और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की तस्वीरें देखें… सरकारी स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई, टाटा कॉलेज से मिली उड़ान सीताराम सिंकू की सफलता की कहानी भी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मंझगांव के सरकारी स्कूल से पूरी की, जबकि उच्च शिक्षा टाटा कॉलेज, चाईबासा से हासिल की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत का हाइड्रोजन ट्रेन युग में प्रवेश करना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के विजन को साकार करने के लिए रेलवे का हर कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रहा है। रेलवे बोर्ड में आने से पहले वे दक्षिण-पूर्व रेलवे में प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता (पीसीएमई) के पद पर रह चुके हैं। भारतीय रेलवे यांत्रिक इंजीनियर्स सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वंदे भारत से नेट-जीरो मिशन तक में भूमिका सीताराम सिंकू का रेलवे के विभिन्न जोनों में तकनीकी, परिचालन और प्रशासनिक क्षेत्रों में लंबा अनुभव रहा है। वे खड़गपुर में चीफ वर्क्स मैनेजर भी रह चुके हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल के डोंगवापोसी व चाईबासा क्षेत्र से उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट, अमृत भारत (वर्जन 3.0) और नमो भारत जैसी आधुनिक परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बेंगलुरु स्थित रेल व्हील फैक्ट्री में उनके नेतृत्व में एक वर्ष में रिकॉर्ड दो लाख रेल पहियों का उत्पादन किया गया। साथ ही वे रेलवे की गति शक्ति योजना से भी जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे वर्ष 2030 तक भारतीय रेलवे को नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत चलेंगी 35 ट्रेनें भारत सरकार ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसी के तहत रेलवे देश के अलग-अलग हेरिटेज और पहाड़ी रूटों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रहा है। एक ट्रेन बनाने में करीब 80 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जबकि हर रूट पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए करीब 70 करोड़ रुपए अलग से खर्च किए जाएंगे।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles