प्राइवेट क्षेत्र में महिलाओं को पेंशन की व्यवस्था हो। सार्वजनकि स्थानों पर ज्यादा महिला शौचालय बनें और वे स्वच्छ हों। सचिवालयों में आंगनबाड़ी हो। आठवीं तक किशोरियों की शिक्षा मुफ्त हो। सरकारी महिला…
प्राइवेट क्षेत्र में महिलाओं को पेंशन की व्यवस्था हो। सार्वजनकि स्थानों पर ज्यादा महिला शौचालय बनें और वे स्वच्छ हों। सचिवालयों में आंगनबाड़ी हो। आठवीं तक किशोरियों की शिक्षा मुफ्त हो। सरकारी महिला कर्मियों से टैक्स न लिया जाए। स्कूलों में लड़कियों को हेल्थ और सेक्स एजुकेशन दी जाए। महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार हों…।
ये वो तमाम मुद्दे हैं जिन्हें ध्यान में रखकर महिलाएं पोलिंग बूथों का रुख करेंगी। ‘हिन्दुस्तान’ कार्यालय में गुरुवार को आयोजित ‘आओ राजनीति करें’ संवाद में ‘अब नारी की बारी’ विषय पर बात करने के लिए इकट्ठा हुई कामकाजी महिलाओं का चुनाव को लेकर दृष्टिकोण बिल्कुल साफ था कि जो भी सरकार बने वह महिलाओं की सुरक्षा, उनके अधिकार और सम्मान का ध्यान जरूर रखे।
संवाद शुरू हुआ तो सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सुरक्षा और स्वास्थ थे। इनमें भी सेनेटरी नेपकिन के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता सबसे प्रमुख था। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की सुपरवाइजर रेनू शुक्ला ने कहा कि लखनऊ में डीजीपी ऑफिस के पास भी महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाएं हो जाती हैं। सुरक्षा के लिए कनून बने हैं तो पालन क्यों नहीं होता। डॉ. सविता ने महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी पर गंभीरता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान न दिए जाने का ही नतीजा है कि उनमें बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। फिर बात उठी शौचालयों की कमी की। इस पर सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि सड़क और बाजार तो छोड़िए सरकारी विभागों में भी बाथरूम इतने गंदे और बदबूदार हैं कि महिलाएं वहां जाकर अपने साथ रोग लेकर लौटती हैं। इन्हीं सबके बीच बाल मजूदरी पर भी बात उठी।
छोटे, गरीब बच्चों से बाल मजदूरी कराने को सिरे से गलत करार दिया गया। बात वोटिंग प्रतिशत पर आई तो यह खुलासा भी हुआ कि गांव की महिलाएं वोट करने तो निकलती हैं लेकिन मर्जी उनकी नहीं होती। आज भी वे घर के मुखिया के आदेश में बंधी रहती हैं। इस मानसिकता को बदलकर सही उम्मीदवार का चुनाव करने की स्वतंत्रता महिलाओं को मिलनी चाहिए। कुल मिलाकर नजरिया साफ है कि वोट उसे जो आधी आबादी की बात करेगा।
हमारे लिए बनें बेहतर कानून, इसलिए करें मतदान
‘आओ राजनीति करें’ संवाद में ‘अब नारी की बारी’ विषय पर संवाद में शामिल हुईं कामकाजी महिलाओं में आली संस्था की शुभांगी ने अपील की कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए अधिक से अधिक संख्या में वोट करें। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून और नीतियां तभी बन सकती हैं जब हमारी वोटिंग में बड़ी भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि हम वोट नहीं करेंगे तो हमेशा ऐसे कानून बनते रहेंगे जो महिलाओं को बांधते रहेंगे। युवा महिलाओं से भी बढ़-चढ़कर वोट डालने निकलने की अपील की गई। सुधा सिंह ने महिलाओं से जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करने की अपील की।
प्रमुख मुद्दे जो उठे
1. प्राइवेट क्षेत्र में महिलाओं को पेंशन की व्यवस्था।
2. महिला शौचालय ज्यादा बनें और स्वच्छ हों।
3. सचिवालयों में आंगनबाड़ी।
4. आठवीं तक किशोरियों की शिक्षा मुफ्त।
5. सरकारी महिला कर्मियों से टैक्स न लिया जाए।
6. स्कूलों में लड़कियों के लिए हेल्थ और सेक्स एजुकेशन।
7. महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार। 8. वोटिंग अपनी मर्जी से।
9. कार्यस्थल पर, सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा।
10. स्कूलों में डॉक्टरों से किशोरियों की काउंसलिंग।
समानता और सम्मान देने वाले की बनाएंगे सरकार
शिक्षा का स्तर सुधारने की जरूरत है। गांवों में आज भी 98 प्रतिशत बच्चियां पाचवीं के बाद नहीं पढतीं। आने वाली सरकार बच्चियों के लिए 8वीं तक शिक्षा मुफ्त करे। बच्चों में बढ़ती नशाखोरी पर रोक लगे।
-शशिकान्ता, प्रान्तीय महामंत्री सुपरवाइजर एसोसिएशन
बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं की सेहत से जुड़े मामलों के लिए शुरू से ही किशोरियों की काउंसलिंग स्कूलों में होनी चाहिए। बेटे और बेटी का अंतर घर से ही खत्म होना चाहिए।
डॉ. सरिता सक्सेना, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट, लोहिया अस्पताल
कानूनी अधिकारों में बराबरी का हक मिले, स्वतंत्रता के साथ में महिलाओं को सम्मान मिले। वोट हमारी शक्ति है जिसका प्रयोग बिना किसी के प्रभाव में आकर अपनी मर्जी से करना चाहिए। जरूरत है महिलाओं को खुलकर आगे आने की और अपनी बात कहने की।
शुभांगी, एडवोकेट, आली
जाति-धर्म से हटकर महिलाएं वोट करें। प्राइवेट नौकरी में महिलाओं को पेंशन मिलनी चाहिए। महिला मुद्दों को किसी भी पार्टी ने चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है इसलिए हम खुद तय करें कि सही कौन है।
सुधा सिंह, सहायक सचिव, भारत विकास परिषद
महिलाओं को अपने मुद्दों के लिए वोट करना होगा। रोजाना परेशानियों का सामना करने वाली महिलाओं को अपने हक के लिए बोलना होगा उनको इस बार वोट करना होगा।
प्रतीक्षा, सदस्य, आली
हमारा वोट बहुमूल्य
ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को आगे लाना चाहिए, यह सरकार की जिम्मेदारी है। उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार पहल करे। महिलाएं देश के भविष्य निर्माण व बेटियों के जीवन को उज्ज्वल बनाने के लिए वोट करें।
रागिनी श्रीवास्तव, समाजसेवी
महिलाओं की सुरक्षा प्राथमिकता हो। जो महिलाएं समाज सुधार व राजनीति में योगदान दे रही हैं उनके लिए योजनाएं बनानी चाहिए। अपने प्रति सोच में बदलाव के लिए महिलाएं खुद आगे बढ़कर वोट करें।
सविता शुक्ला, महासचिव जन कल्याण समिति
किसी भी पार्टी ने अपने एजेंडे में महिलाओं को शामिल नहीं किया है। घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न पर लगाम नहीं लग पा रही है ऐसे में महिलाओं को अपने मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट करना चाहिए।
मीना सिंह, कर्मचारी नेता
महिलाओं को अपना मत रखने का और कॅरियर चुनने का अधिकार मिले। ज्यादा से ज्यादा संख्या में जाकर महिलाएं वोट करें जिससे सरकार को हमारी ताकत का अहसास हो। हमारा वोट भी बहुमूल्य है।
रिचि सिंह, निदेशक, नाट्य संस्था

