लैंगिक असमानता को समाप्त किये बिना सशक्त भारत सपना पूरा नहीं होगा। महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर देना होगा। रूढ़िवादी परंपराओं से निकलकर वर्तमान में जीना होगा।…
लैंगिक असमानता को समाप्त किये बिना सशक्त भारत सपना पूरा नहीं होगा। महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ और रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर देना होगा। रूढ़िवादी परंपराओं से निकलकर वर्तमान में जीना होगा। व्यवस्था सुधार के लिए महिलाओं को राजनीति में स्थान मिले ताकि उनकी बातें सुनी जा सकें। महिलाओं को साक्षर नहीं बल्कि शिक्षित बनाना होगा। इसके लिए संयुक्त प्रयास होने चाहिए। सशक्त लोकतंत्र का निर्माण तभी संभव है जब राजनीति में महिलाओं भागीदारी बढ़ेगी।
ये विचार रविवार को महमूरगंज, गोविंद नगर स्थित एक्मे बिकेन स्कूल में आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के ‘आओ राजनीति करें’ अभियान के तहत ‘अब नारी की बारी’ संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने साझा किए। सामाजिक भागीदारी, महिला आरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कन्या भ्रूणहत्या, सेल्फ डिफेंस, महिलाओं की स्वतंत्रता और आर्थिक आजादी जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
रमा सिंह ने कहा कि बदलाव की शुरुआत घर से करनी होगी। किरन सिंह ने कहा कि बदलाव देखने को मिल रहा है। नमिता सिंह ने गृहस्थ महिलाओं के लिए योजना बनाने की बात कही। पूर्णिमा राय ने कहा कि जो महिलाओं की बात करेगा वही देश को आगे ले जाएगा। शर्मिला राय ने बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही। ज्योति जसमतिया ने कहा कि जो जनता के हित की बात करे वहीं नेता। नेहा निगम ने सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। वेदिका दुबे ने योजनाओं में पारदर्शित लाने की बात कही। सिमरन केशरी ने महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए। पूनम श्रीवास्तव ने कहा कि आरक्षण नहीं बल्कि योग्य महिलाओं को नौकरी में जाने का मिले मौका।
महिलाओं को हो अधिकारों की जानकारी
महिलाओं का विकास तभी संभव जब उन्हें अधिकारों के बारे में जानकारी होगी। योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी है। महिला आरक्षण बिल पास होना चाहिए।
डॉ.मधुमिता मित्रा
नेता शिक्षित हो और उसके अंदर संस्कार हो। महिला सम्मान की बात तभी सार्थक होगी जब शिक्षा और संस्कार दोनों होंगे।
कल्पना सक्सेना
महिला सुरक्षा की बात सभी करते हैं, लेकिन अमल नहीं होता। नेता वही जो ईमानदारी से काम करे और देश की बात करे।
अल्का अग्रवाल
महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा नि:शुल्क हो ताकि उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले। पैसे के अभाव में उच्च शिक्षा लेने से वंचित न होना पड़े।
भारती पांडेय

