अब नारी की बारी- यह छोटा सा वाक्य छात्राओं, युवतियों और महिलाओं के लिए बड़ा बनता जा रहा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान में पिछले दिनों शुरू किया गया यह वाक्य आगामी लोकसभा चुनाव के लिए स्लोगन बनता जा…
अब नारी की बारी- यह छोटा सा वाक्य छात्राओं, युवतियों और महिलाओं के लिए बड़ा बनता जा रहा है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान में पिछले दिनों शुरू किया गया यह वाक्य आगामी लोकसभा चुनाव के लिए स्लोगन बनता जा रहा है। इसने छात्राओं को पूरी तरह झकझोर दिया है। बुधवार को वे पूरी तरह मुखर रहीं। एमबीए की छात्राओं ने साफ तौर पर कहा कि महिला सशक्तीकरण का स्लोगन समाप्त कर देना चाहिए, क्योंकि स्लोगन भर से काम नहीं चलने वाला। छात्राएं व महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का दमखम रखती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर इसे साबित भी किया है पर उन्हें समुचित मौके नहीं मिल रहे। इसलिए महिला सशक्तीकरण के नारे के बदले समानता का अधिकार चाहिए। शिक्षा, सुरक्षा सहित अन्य गंभीर मुद्दों पर भी बेबाकी से बात रखीं।
मौका था बुधवार को आरा शहर के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग में ‘आओ राजनीति करें’ कार्यक्रम के तहत आयोजित संवाद का। संवाद में छात्राओं ने पढ़ाई-लिखाई से लेकर अधिकार तक की बात उठाई और सबमें आजादी को जरूरी बताया। उनका मानना था कि आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें वे आगे बढ़कर परचम नहीं लहरा रही हैं। महिला अधिकार व अस्मिता की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना था कि स्कूल से लेकर कॉलेज तक की लड़कियों के सिलेबस में केवल किताबी ज्ञान नहीं, नैतिक व व्यावहारिक ज्ञान भी मिले। रोजगारपरक कोर्स को बढ़ावा मिले। शैक्षणिक सत्र में सुधार भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा में सुधार हो।
लोकतंत्र के महापर्व में हम युवतियों व महिलाओं को बढ़़कर हिस्सा लेने की जरूरत है। मतदान स्वेच्छा से करना भी जरूरी है।
– कनक कुमारी
समुचित शिक्षा के साथ शैक्षणिक सत्र नियमित किया जाये। सत्र नियमित नहीं होने से जॉब पाने में भी पीछे होना पड़ता है। -शालिनी
महिलाएं कम नहीं हैं। पढ़ाई-लिखाई में भी आगे हैं और प्रेरणास्रोत भी बन रही हैं। महिला अत्याचार रोकने की जरूरत है। -ज्योतिका राज
अन्य क्षेत्रों की तरह चुनाव में भी बराबरी का हक मिलना चाहिए। तभी महिलाएं बड़ी संख्या में संसद व विधानसभा में पहुंचेंगी। -प्रतिभा
महिलाएं व्यवस्थापक होती हैं। राजनीति में भी मौका मिले तो वे साबित कर सकेंगी लेकिन टिकट बंटवारे में इस बार भी छली गयी हैं।
-कृतिका
छात्राओं को शिक्षा से ले नौकरी तक में समानता का अधिकार मिलेगा तो वे बहुत आगे जा सकती हैं।
-तबस्सुम परवीन

