पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) का शिशु रोग विभाग अब विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस नए भवन में स्थानांतरित हो गया है। शनिवार से नए वार्ड में मरीजों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिसमें पहले ही दिन 4 बच्चों को भर्ती किया गया।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अगले सात दिनों तक पुराने टाटा वार्ड और नए भवन में इलाज की व्यवस्था समानांतर रूप से जारी रहेगी। इसके बाद पुराने वार्ड को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

PMCH के नए भवन में शिशु रोग विभाग की शुरूआत करते अस्पताल अधीक्षक।
नए परिसर में कुल 96 इंडोर बेड की सुविधा
नए परिसर में कुल 96 इंडोर बेड की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें 58 बेड का अत्याधुनिक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) और बाल गहन चिकित्सा इकाई (PICU) शामिल है। यहां गंभीर नवजात और बच्चों के इलाज के लिए मॉनिटरिंग, वेंटिलेशन और संक्रमण नियंत्रण की वैश्विक मानकों के अनुरूप सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
मरीजों को सीधे नए वार्ड में किया गया शिफ्ट
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि रेफर किए गए मरीजों को सीधे नए वार्ड में स्थानांतरित कर तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जन्म के तुरंत बाद जांच और उपचार की एकीकृत व्यवस्था की गई है, जिससे नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिलेगी।

इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी
नवजात शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश कुमार झा ने जानकारी दी कि यहां अत्यंत गंभीर स्थिति में बच्चों को उपचार के लिए लाया जाता है। उन्होंने बताया कि नए भवन में हाई-एंड वेंटिलेटर, इन्क्यूबेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, केंद्रीय ऑक्सीजन सपोर्ट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डॉ. झा ने कहा कि निजी अस्पतालों में जिस उपचार पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, वही सुविधा अब सरकारी अस्पताल में भी मरीजों को मिलेगी।

नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) और बाल गहन चिकित्सा इकाई (PICU) की सुविधा।
थैलेसीमिया-हीमोफिलिया मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर
शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमंत वर्मा ने बताया कि विभाग पहले से अपग्रेड था, लेकिन नए भवन में सुविधाएं और बेहतर हो गई हैं। थैलेसीमिया और हीमोफिलिया के मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर उत्कृष्ट स्तर पर संचालित होगा। सुबह भर्ती कर शाम तक सुरक्षित ट्रांसफ्यूजन की सुविधा दी जाएगी।
कुपोषित बच्चों के लिए न्यूट्रिशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) भी शुरू कर दिया गया है। रेफर मरीजों के लिए त्वरित इमरजेंसी सपोर्ट की व्यवस्था नए वार्ड में उपलब्ध है।





