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महाराष्ट्र के बाद झारखंड देश का दूसरा राज्य होगा, जहां जीएसटी विधेयक बदलेगा
झारखंड सरकार राज्य में कारोबार को सुगम बनाने और व्यापारियों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। वर्तमान में लागू जीएसटी अधिनियम, 2017 में संशोधन के लिए राज्य सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में संशोधन विधेयक पेश करेगी। इसके बाद झारखंड देश का दूसरा राज्य होगा, जो केंद्र के नए प्रावधानों के अनुरूप अपने जीएसटी कानून में संशोधन लागू करेगा। इससे पहले महाराष्ट्र में संशोधन हो चुका है। विधानसभा से विधेयक पारित और अधिसूचित होने के बाद राज्य के व्यापारियो और उद्यमियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य व्यवसायियों के लिए कर प्रणाली को व्यापार अनुकूल बनाना, रिफंड प्रक्रिया को तेज करना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और राज्य व केंद्र सरकार के बीच एक समान जीएसटी ढांचा लागू करना है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले बजट सत्र में जीएसटी अधिनियम में संशोधन किया था। लेकिन राज्यों में यह तभी लागू होगा, जब राज्य सरकार भी अपने यहां वैसा ही संशोधन अधिनियम लाएगी। राज्य सरकार इसे लागू करने के लिए पहले अध्यादेश जारी करने की तैयारी कर रही थी। लेकिन विधानसभा का मानसून सत्र अधिसूचित होने के कारण सरकार ने इसी सत्र में यह विधेयक लाने का फैसला किया। इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। विधेयक पारित होने के बाद राज्य वाणिज्य कर विभाग अपने आईटी सिस्टम और जीएसटी पोर्टल पर बदलाव करेगी। संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें नए प्रावधानों के अनुसार अपडेट करेगी। जानिए…संशोधन में क्या-क्या प्रमुख बदलाव होंगे
1. बिक्री के बाद छूट के नियम सरल होंगे
-पोस्ट सेल डिस्काउंट (बिक्री के बाद छूट) के नियम सरल होंगे। कंपनियां सामान बेचने के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट के लिए अधिक स्पष्टता के साथ क्रेडिट नोट जारी कर सकेंगी। इससे टैक्स अधिकारियों और व्यापारियों के बीच डिस्काउंट को लेकर होने वाले कानूनी विवाद काफी हद तक खत्म होंगे।
2. रिफंड की व्यवस्था में सुधार होगा
-जिन मामलों में इनपुट टैक्स पर दिया गया कर आउटपुट टैक्स दायित्व से अधिक है, वहां कारोबारियों को अंतरिम रिफंड देने का प्रावधान किया जाएगा।
3. छोटे निर्यातकों को होगा फायदा
-निर्यात पर आईजीएसटी रिफंड के लिए न्यूनतम सीमा हटेगी। इससे छोटे निर्यातकों को छोटे दावों पर भी रिफंड की सुविधा मिलेगी। सेवाओं की आपूर्ति के स्थान के नियमों में सुधार से अंतरराष्ट्रीय सेवा लेनदेन में कर निर्धारण स्पष्ट होगा, जिससे भारतीय सेवा निर्यातक वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
4. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस आसान होगा
-ईज ऑफ डुइंग बिजनेस में आसानी होगी। कर विवाद और मुकदमे कम होंगे। रिफंड जल्दी मिलने से कार्यशील पूंजी पर दबाव कम होगा। सरकार को भी पारदर्शी टैक्स प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
