
कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें पत्र सौंपा जिसमें पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का आग्रह किया गया है. पत्र में अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया है कि याचिकाएं दायर हुए पांच सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, फिर भी न तो कोई नोटिस जारी किया गया है और न ही सुनवाई की तारीख तय की गयी है. उन्होंने दलबदल विरोधी कानून की भावना को बनाए रखने के लिए इस मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की.
19 जून को दायर की गयी थी याचिका
अपने पत्र में अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतने वाले 20 सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत की और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआइ) नाम की एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी में शामिल हो गये. इन सभी सांसदों के खिलाफ 19 जून को अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की गयी थीं. पत्र में कहा गया है कि याचिकाएं दायर होने के पांच सप्ताह बाद भी कोई निर्देश जारी न करना चिंता का विषय है. बनर्जी ने तर्क दिया कि संविधान के तहत लोकसभा स्पीकर को मिली शक्तियों का इस्तेमाल एक निश्चित समय-सीमा के भीतर किया जाना चाहिए ताकि दलबदल विरोधी कानून का उद्देश्य बेअसर न हो जाये.
सर्वदलीय मीटिंग में बुलाये जाने पर जतायी आपत्ति
पत्र में अभिषेक बनर्जी ने मॉनसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जहां इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई अभी भी लंबित है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाया, जिससे स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हुआ. तृणमूल नेता ने कहा कि किसी गुट के गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी से जुड़े होने को संसदीय मान्यता देने से दलबदल विरोधी कानून के प्रावधान कमजोर होते हैं. इसलिए, इन सांसदों की कानूनी स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता को दूर करना जरूरी है.
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निष्पक्ष सुनवाई की मांग
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर से अपील की है कि वे अयोग्यता याचिकाओं पर बिना देरी किए सुनवाई शुरू करें. चूंकि हर याचिका किसी खास सांसद की अयोग्यता से जुड़ी है और मामलों के तथ्य अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए सभी 20 मामलों की सुनवाई अलग-अलग होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा और प्रभावी मौका दिया जाना चाहिए. उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया है कि वह संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाएं और जल्द से जल्द अंतिम आदेश जारी करें.
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