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25 जुलाई को पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित बिहार बंद के दौरान हुई पुलिस फायरिंग और छात्रों की गिरफ्तारी के विरोध में गुरुवार को भाकपा (माले) ने शहर में प्रतिवाद मार्च निकाला। मार्च के समापन पर चंद्रशेखर मोड़ पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए माले के जिला सचिव इंद्रजीत चौरसिया ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बिहार बंद के दौरान सीवान में पुलिस द्वारा कथित रूप से AK-47 से फायरिंग की गई, जिसमें तीन छात्र घायल हुए। पद से हटाने की मांग की उन्होंने इस घटना के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें पद से हटाने की मांग की। इंद्रजीत चौरसिया ने कहा कि पुलिस अधीक्षक यह कह रहे हैं कि आइसा और आरवाईए के आह्वान पर भीड़ जुटी थी, इसलिए माले के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों के आक्रोश के लिए सरकार और उसकी नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया और जनता की आवाज को कुचलने का प्रयास किया गया। पिस्टल दिखाकर राजनीति नहीं करने की धमकी – माले नेता माले नेता ने आरोप लगाया कि पार्टी के जिला कमेटी सदस्य विशाल यादव को उनके घर से गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें पिस्टल दिखाकर राजनीति नहीं करने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल पूछे गए, जिस पर उन्होंने कहा कि माले किसानों और आम लोगों के सहयोग से संचालित होने वाली पार्टी है। सभा को संबोधित करते हुए इंद्रजीत चौरसिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने राजनीतिक दुर्भावना और साजिश के तहत कार्रवाई की है। पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को बल प्रयोग से नहीं दबाया जा सकता और दोषी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने गिरफ्तार छात्रों और कार्यकर्ताओं की अविलंब रिहाई, पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच तथा पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई।
