Friday, July 31, 2026

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बांकीपुर का एग्जिट पोलः BJP को बढ़त, मार्जिन घटेगा:कायस्थ-कोयरी को छोड़ PK ने हर समाज में लगाई सेंध, बूथ मैनेजमेंट से BJP आगे


पटना के बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हुआ। मुख्य मुकाबला भाजपा के नीरज सिन्हा और जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर के बीच देखने को मिला। इस सीट के जातीय समीकरण और वोटिंग परसेंटेज को देखें तो भाजपा को बढ़त नजर आ रही है। करीब–करीब इतने ही वोटिंग प्रतिशत पर बीजेपी तीन बार यहां पहले भी चुनाव जीत चुकी है। चुनाव प्रचार से लेकर मतदान केंद्र तक के माहौल को देखें तो प्रशांत किशोर ने भी कड़ी टक्कर दी है। प्रशांत किशोर का वोट बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि सिर्फ 34.16% वोटिंग ने भाजपा और जन सुराज दोनों खेमों को बेचैन कर दिया है। भाजपा या जन सुराज उपचुनाव में किसका पलड़ा भारी है? मतदान केंद्रों पर आए लोगों ने क्या कहा? पढ़िए रिपोर्ट…। बांकीपुर से भाजपा ने भले ही नीरज सिन्हा को प्रत्याशी बनाया हो, लेकिन इस चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वह इस सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। ऐसे में इस बार भी भाजपा की जीत की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी की संभावित जीत की ये 4 बड़ी वजहें हैं… 1- जातीय समीकरण, कायस्थ वोट एकजुट 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन को 98,299 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहीं राजद की रेखा गुप्ता को 46,363 वोट मिले थे। जीत का अंतर 51 हजार से अधिक वोटों का रहा। इस बार यह अंतर कम हो सकता है। बांकीपुर में वोटर की संख्या 3 लाख 79 हजार है। 34.16% वोटिंग हुई। मतलब करीब 1.29 लाख वोट डाले गए हैं। कायस्थ समाज के लोग यहां करीब 15 फीसदी हैं। भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत वोट बैक 20 से 22% है। वैश्य करीब 12% हैं। यह वोट बैंक वर्षों से भाजपा का मजबूत आधार रहा है। इस समीकरण का असर है कि यहां भाजपा को 1995 के बाद से कभी 50 फीसदी से कम वोट नहीं मिले। जानकारी के अनुसार कायस्थ और बनिया वोट बैंक भाजपा के साथ एकजुट नजर रहा है। भूमिहार और ब्राह्मण समाज के कुछ वोट प्रशांत किशोर को मिल सकते हैं। अगर यह टूट बड़ी नहीं हुई तो भाजपा को चुनाव जीतने में परेशानी नहीं होगी। इस बार कुशवाहा वोट बीजेपी को गया है। सम्राट चौधरी के सीएम होने की वजह से ऐसा है। कुर्मी वोट के लिए नीतीश कुमार और निशांत कुमार की वीडियो काम कर गया है। 2- कैडर की मजबूती, कम वोटिंग में भी बीजेपी आगे रही बांकीपुर में सिर्फ 34.16% (5 बजे तक) मतदान हुआ है। इस उदासीनता का कारण यह भी हो सकता है कि लोग समझ रहे हैं कि उपचुनाव से सरकार का कुछ बनना-बिगड़ना नहीं है। 2006 में बांकीपुर (पटना पश्चिम) में उपचुनाव हुआ था तो 19.85% वोटिंग हुई थी। मतदाताओं की कुल संख्या 5.12 लाख थी। नितिन नवीन को 76025 (82.31%) वोट मिले थे। उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के अजय कुमार सिंह को 10858 (11.76%) वोट मिले थे। कम वोटिंग की स्थिति में पार्टी का कैडर अहम फैक्टर होता है। जीत उस पार्टी को मिलती है, जिसके संगठन के लोग अपने समर्थक वोटर को अधिक संख्या में पोलिंग बूथ पहुंचा सकें। बीजेपी कैडर वाली पार्टी है। यही वजह है कि बीजेपी के कार्यकर्ता हर बूथ के आसपास काफी एक्टिव रहे। चाहे वह पर्ची बांटना हो या अन्य तरीके से बूथ मैनेजमेंट। वोट डालने आए एस.एस. गुप्ता ने कहा, ‘प्रशांत किशोर और नितिन नवीन दोनों ने कोर कसर नहीं छोड़ा है। दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। बीजेपी के पास कैडर वोट है। आरजेडी को पिछले कई चुनाव से देख रहे हैं, उसे शहरी वोट कम मिलते हैं।’ 3- नितिन नवीन के व्यवहार और काम की चर्चा 2006 से 2025 तक नितिन नवीन लगातार बांकीपुर से विधायक रहे। इस दौरान क्षेत्र में विकास के काम किए हैं। मंदिरी नाले पर सड़क बनवाया। अर्बन हेल्थ सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, पटना यूनिवर्सिटी में दो नए भवन और बिहार का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर जैसे कई बड़े काम कराए हैं। मतदान में इसका असर दिखा है। केंद्र और बिहार में भाजपा की सरकार है। ऐसे में मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को लगता है कि भाजपा का विधायक होगा तो विकास के काम ज्यादा होंगे। फुटबॉल कोच रहे नंद किशोर ने कहा, ‘पटना में तो विकास बहुत हुआ है। इस उपचुनाव को विकास से जोड़ने की जरूरत नहीं है। यह तो फॉर्मेलिटी की तरह है।’ 4. सालों बाद पुलिस ने प्रभावित किया मतदान चुनाव के पहले की रात से लेकर खत्म होने तक पटना पुलिस की कार्रवाई ने भाजपा को काफी मदद पहुंचाई है। पूरे वोटिंग के दौरान जिस तरह से पुलिस ने अपना रवैया अपनाया, वैसा बीते 20 साल में नहीं दिखा था। नीतीश शासन में पुलिस का वोटिंग के दौरान ऐसा अग्रेसिव व्यवहार देखने को नहीं मिलता था। अब 5 पॉइंट में जानिए, कैसे कड़ी टक्कर दे रहे प्रशांत किशोर 1- सवर्ण वोट बैंक में सेंधमारी प्रशांत किशोर बदलाव का वादा कर चुनावी मैदान में उतरे। मतदान केंद्र पर कई वोटर हमें बदलाव की बात कहते दिखे। ग्राउंड से मिली जानकारी के अनुसार ब्राह्मण जाति से आने वाले प्रशांत ने बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में सेंधमारी की है। खास तौर से ब्राह्मण वोटर का रुझान ऐसा बता रहा है। 10-15% सवर्ण वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है। दूसरी तरफ प्रशांत आरजेडी के मुस्लिम वोट बैंक में भी पैठ बनाते दिखे। दुजरा, सब्जीबाग के इलाके में यह खूब दिखा। 2- बड़े चेहरे का PK को मिल रहा फायदा बांकीपुर में नामांकन के बाद भाजपा को प्रत्याशी बदलना पड़ा। मंडल स्तर के कार्यकर्ता को पार्टी ने टिकट दिया। दूसरी ओर जनता के सामने राजनीति में बड़े नाम प्रशांत किशोर थे। प्रशांत के आगे बीजेपी के उम्मीदवार की मेरिट चर्चा में रही। कई आम वोटर ने कहा कि पढ़े-लिखे को मौका देना चाहिए। ऐसा नेता चाहिए जो महंगाई, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, अपराध और जनता के दूसरे मुद्दे को मजबूती से उठा सके। मतलब यह कि प्रबुद्ध वोटर्स के सामने उम्मीदवार का ताकतवर होना भी मायने रखता है। 3. RJD का कमजोर चुनाव प्रचार, तेजस्वी देर से मैदान में उतरे भाजपा को पसंद नहीं करने वाले मतदाताओं के बड़े समूह का वोट जन सुराज को मिल सकता है। इसकी वजह चुनाव प्रचार में राजद की कमजोरी बताई जा रही है। RJD ने फिर से रेखा गुप्ता को मौका दिया। तेजस्वी यादव विदेश चले गए। उन्होंने आखिर के दो दिन बांकीपुर में प्रचार किया। उनकी गैर मौजूदगी में रेखा गुप्ता को पार्टी के बड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं का पूरा साथ नहीं मिला। इससे लोगों को साफ मैसेज गया कि तेजस्वी इस सीट के प्रति उदासीन हैं। रेखा गुप्ता ने डोर-टू-डोर जाने की कोशिश की, लेकिन न तो वैश्य वोट जुटा सकीं न मुसलमानों का वोट एकजुट रख पाईं। यही वजह है कि आम चर्चा यही है कि टक्कर बीजेपी और प्रशांत किशोर के बीच है। जिन लोगों को भाजपा के विरोध में वोट देना था उनमें से बहुतों ने राजद की जगह प्रशांत किशोर को वोट देना तय किया। 4. युवाओं में लोकप्रियता, पेपर लीक का गुस्सा प्रशांत किशोर की लोकप्रियता युवाओं में ज्यादा देखी गई। नीट पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से केंद्र और बिहार सरकार ने जिस तरह निपटा उससे युवाओं में गुस्सा था। प्रशांत किशोर ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया। इसका असर मतदान पर नजर आया है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में 18 से 29 की उम्र वाले करीब 53419 वोटर्स हैं। इनमें से काफी संख्या में प्रशांत किशोर की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। कदमकुंआ के एक बूथ से वोट देकर निकले लव कुमार कहते हैं, ‘मुंबई से वोट देने आया हूं। मैंने बदलाव के लिए वोट दिया है। यह सरकार बनाने वाला चुनाव नहीं है, लेकिन बदलाव छोटी शुरुआत से ही होती है।’ ‘हम बिहार के बाहर बिहार के लोगों की दुर्दशा देखते हैं। बिहार के बाहर हादसा होता है तो पता चलता है कि बिहार के मजदूर की मौत हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क की स्थिति खराब है। लोहानीपुर में सड़क की हालत देख लीजिए।’ 5. कोयरी-कायस्थ को छोड़ प्रशांत किशोर ने हर समाज में लगाई सेंध ग्राउंड पर मिल रहे इनपुट के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने कायस्थ और कोयरी/कुशवाहा को छोड़कर हर समाज में सेंध लगाई है। यानी इन दोनों समाज को छोड़कर उनको हर तबके से वोट मिला है। यही कारण है कि पूरे दिन प्रशांत किशोर लड़ाई में बने रहे। भाजपा के सामाजिक समीकरण में अगर प्रशांत किशोर ने 50% तक सेंध लगा दी तब उनकी राह आसान हो जाएगी। वोट डालने पोलिंग बूथ पहुंचे लोगों ने क्या कहा? एस.एस. गुप्ता ने कहा, ‘सुबह मैं अपनी पत्नी के साथ सीडीए बिल्डिंग गया और वोट दिया। यह उपचुनाव है। इसमें हार-जीत का बहुत असर बीजेपी पर नहीं पड़ेगा, लेकिन नितिन नवीन और प्रशांत किशोर की प्रतिष्ठा जरूर दांव पर लगी है।’ रिटायर्ड अफसर विजय कुमार वोटिंग सिस्टम से नाराज दिखते हैं। कहते हैं, ‘मिला-जुलाकर वही लोग सत्ता में घूम-फिरकर आते हैं। कभी बीजेपी में कभी जेडीयू में, कभी कांग्रेस, आरजेडी में आते-जाते हैं। वोट दें देंगे, मैं यह कह रहा हूं कि आम आदमी चुनाव में नहीं आ सकता।’ महिलाओं ने एक स्वर से कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा रुकनी चाहिए। यह नहीं थम रहा है यह। इस पर सरकार को सख्त होना चाहिए। कदमकुआं के बूथ पर पहुंची एक महिला वोटर ने कहा, ‘लड़कियों की सेफ्टी बहुत जरूरी है। क्राइम बढ़ गया है। सबका अपना वोट है, जो जिसे पसंद करता है उसे दे रहा है।’ दूसरी महिला वोटर ने कहा, ‘मैंने तो विकास पर वोट दिया है। कोई भी जीतेगा कुछ कर रहा ही नहीं है। हम मेहनत करेंगे तो खाएंगे।’ कदमकुंआ के साहित्य सम्मेलन बूथ पर वोट देने पहुंचे चित्तरंजन प्रसाद ने कहा, ‘बांकीपुर बीजेपी की खानदानी सीट है, लेकिन इस बार टक्कर प्रशांत किशोर से है।’ अजीत रंजन ने कहा, ‘बांकीपुर में इस बार एकतरफा मामला नहीं है। बीजेपी के नीरज कुमार और जनसुराज के प्रशांत किशोर के बीच टक्कर है।’ संदीप कुमार कहते हैं, ‘बांकीपुर में त्रिकोणीय मुकाबला है।’ बीजेपी ने जितनी ताकत लगाई उतना असर नहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा, ‘बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम क्या होगा यह बताना कठिन है। जिस तरह से वोटिंग परसेंटेज कम है उससे लग रहा है कि वोटर में उदासीनता है। शायद ही कोई बूथ हो जहां लंबी लाइन लगी दिखी।’ ‘इसका नुकसान किसे होगा और फायदा किसे, इसके बारे में कहना अभी मुनासिब नहीं। इसका कोई सेट फार्मूला नहीं। हां बीजेपी ने जितनी ताकत लगाई उस हिसाब से समर्थन मिलता नहीं दिखाई दे रहा।’ बीजेपी के वोट बैंक में सेंधमारी हुई वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार कहते हैं, ‘यह सीट नितिन नवीन की प्रतिष्ठा से जुड़ी है। यहां वोटिंग परसेंटज कम होने का संकेत है कि जीत-हार का अंतर कम होगा। बीजेपी के बेस वोट बैंक सवर्णों में प्रशांत किशोर ने सेंधमारी की है।’ संतोष कुमार कहते हैं– प्रशांत किशोर की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वे बड़े चुनावी रणनीतिकार हैं। अगर हारते हैं तो लोग सवाल करेंगे। बीजेपी के साथ नितिन नवीन, सम्राट चौधरी जैसे नेताओं की ताकत है।

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