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मानव तस्करी पर लगाम कसने के लिए अब राज्य के महिला थानों में विशेष ‘एंटी-ट्रैफिकिंग इकाई’ की स्थापना की जाएगी। गुरुवार को ‘विश्व एंटी ट्रैफिकिंग दिवस’ के अवसर पर सूबे के डीजीपी ने यह अहम घोषणा की। उन्होंने जिले में मानव तस्करी के खिलाफ एक अलग सेल बनाने का निर्देश देते हुए इसके लिए जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजने को कहा है। महिला थाने के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के तहत महिला थाने में मुख्य रूप से दो नई इकाइयों का गठन किया जाएगा। इनमें से एक इकाई विशेष रूप से सिर्फ मानव तस्करी के मामलों की जांच और रोकथाम का काम करेगी, जबकि दूसरी इकाई महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों पर केंद्रित होगी। इन दोनों महत्वपूर्ण इकाइयों की कमान इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही, मामलों की गंभीरता और बेहतर पुलिसिंग को ध्यान में रखते हुए पूरे महिला थाने का प्रभार अब डीएसपी रैंक के अधिकारी को देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिले में चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं तस्करी के मामले पुलिस महकमे की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जिले में पिछले कुछ वर्षों से मानव तस्करी की घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। इन तस्करों के निशाने पर सबसे अधिक स्कूल जाने वाली नाबालिग छात्राएं और गरीब परिवारों की बच्चियां होती हैं। कुछ समय पहले ही पुलिस ने एक बड़े मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। चौंकाने वाली बात यह थी कि इस गिरोह में कई महिलाएं भी सक्रिय रूप से शामिल थी। जिनका काम नाबालिग और गरीब बच्चियों को बहला-फुसलाकर तस्करों के हवाले करना था। हर साल गायब हो रही 100 से अधिक किशोरियां आंकड़ों पर गौर करें तो नालंदा जिले की स्थिति भयावह है। यहां हर साल 100 से अधिक किशोरियों के अपहरण या गुमशुदगी के मामले सामने आते हैं। इनमें से कई मामले शुरुआत में प्रेम-प्रसंग के लगते हैं, लेकिन अंततः लड़कियां मानव तस्करों के खतरनाक चंगुल में फंस जाती हैं। एक बार इस दलदल में फंसने के बाद उनका वापस लौटना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इस वर्ष हालात और भी चिंताजनक हैं। स्कूल जाने वाली एक से अधिक लड़कियों के एक साथ रहस्यमय तरीके से गायब होने के कम से कम आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। जांच में सामने आया है कि इनमें से अधिकतर मामलों के तार सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़े हुए हैं। नई एंटी-ट्रैफिकिंग इकाई के गठन से उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई होगी और बच्चियों को तस्करों के चंगुल में जाने से रोका जा सकेगा।

