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कड़ी धूप और बारिश भी नहीं रोक सकी आस्था, बोल बम के जयघोष के साथ पहले दिन 1 लाख से ज्यादा कांवरिये बाबाधाम रवाना

सुलतानगंज(भागलपुर)से शुभंकर की रिपोर्ट

Sultanganj Shravani Mela 2026: दोपहर की झुलसा देने वाली धूप, पैरों के नीचे तपती बालू और कंधों पर गंगाजल से भरी कांवर. सुलतानगंज के कांवरिया पथ पर गुरुवार को कुछ ऐसा दृश्य दिखा, जिसने सावन के पहले दिन आस्था की ताकत को फिर साबित कर दिया. जब अचानक तेज बारिश शुरू हुई तो लोग रुकने के बजाय और ऊंची आवाज में “बोल बम” और “हर-हर महादेव” का जयघोष करने लगे. 98 किलोमीटर लंबी सुलतानगंज से देवघर की पदयात्रा एक बार फिर श्रद्धा, समर्पण और सनातन परंपरा के विराट संगम में बदल गई.

धूप से बारिश तक, लेकिन कदम नहीं थमे

गुरुवार को सावन के पहले दिन सुलतानगंज से देवघर जाने वाले कच्चे कांवरिया पथ पर जहां तक नजर गई, वहां तक केसरिया वस्त्रों में शिवभक्तों की लंबी कतार दिखाई दी. कमराय, धांधी-बेलारी, असरगंज और कांवरिया मार्ग के कई हिस्सों में ऐसा लग रहा था मानो आस्था की एक जीवंत नदी लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बह रही हो.

दोपहर में तेज धूप के कारण कई कांवरिये भोजनालयों और सेवा शिविरों में कुछ देर रुके, लेकिन जैसे ही मौसम बदला और मूसलाधार बारिश हुई, पूरा वातावरण शिवमय हो गया. बारिश में भीगते हुए श्रद्धालुओं ने यात्रा जारी रखी और बोल बम के उद्घोष से पूरा मार्ग गूंज उठा.

पहले ही दिन 1 लाख 500 कांवरिये बाबाधाम के लिए रवाना

श्रावणी मेला के पहले दिन उत्तरवाहिनी गंगा तट पर भारी भीड़ उमड़ी. कृष्णगढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार रात 12 बजे तक करीब 1,00,500 कांवरिये पवित्र गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो चुके थे.

इसी दौरान 148 डाकबम श्रद्धालु प्रमाण पत्र लेकर विशेष रूप से बाबाधाम के लिए निकले. देर शाम तक गंगाजल भरने और यात्रा शुरू करने का सिलसिला लगातार चलता रहा.

महाराष्ट्र से दिल्ली तक, हर राज्य से पहुंचे शिवभक्त

इस बार की कांवर यात्रा में देश के कई राज्यों से श्रद्धालु सुलतानगंज पहुंचे हैं. महाराष्ट्र से आए एक शिवभक्त ने बारिश में भीगते हुए मुस्कुराकर कहा, “यह बारिश नहीं, बाबा का आशीर्वाद है.”

दिल्ली से आए माधव बम ने कहा, “कांवर यात्रा में न कोई अमीर होता है और न गरीब. यहां हर व्यक्ति की पहचान सिर्फ एक है, बाबा का बम.”

यही समानता इस यात्रा को सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव भी बनाती है.

क्यों खास मानी जाती है सुलतानगंज से देवघर की यात्रा?

सुलतानगंज से देवघर तक की 98 किलोमीटर की पदयात्रा भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है. श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बिना कांवर नीचे रखे पैदल चलते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं.

स्थानीय विद्वान पंडित संजीव झा बताते हैं कि मान्यता है कि सावन के महीने में देवगण भी अदृश्य रूप से कांवरिया बनकर इसी मार्ग से गंगाजल लेकर बाबाधाम पहुंचते हैं. इसलिए हर कांवरिये में शिव का स्वरूप माना जाता है.

Sultanganj Shravani Mela 2026: घुटनों के बल चल रहे सुबोध, आस्था देख लोग हुए भावुक

श्रावणी मेले का सबसे मार्मिक दृश्य लखीसराय जिले के रामचंद्रपुर निवासी सुबोध कुमार सिंह की यात्रा रही. उन्होंने सुलतानगंज से देवघर तक घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने का संकल्प लिया है.

सुलतानगंज से देवघर तक घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने का संकल्प तो सेल्फी के साथ कांवरिया पथ पर शिवभक्त
सुलतानगंज से देवघर तक घुटनों के बल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने का संकल्प तो सेल्फी के साथ कांवरिया पथ पर शिवभक्त

उनके साथ चल रहा एक सहयोगी आगे-आगे फोम का गद्दानुमा पैड बिछाता चलता है ताकि घुटनों पर कम दबाव पड़े. सुबोध कहते हैं, “यात्रा कठिन जरूर है, लेकिन बाबा भोलेनाथ की शक्ति मुझे मंजिल तक पहुंचाएगी.”

रास्ते में मिलने वाले कांवरिये और स्थानीय लोग उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं. उनकी यात्रा श्रद्धा, संकल्प और अटूट विश्वास का जीवंत उदाहरण बन गई है.

सेवा शिविरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा सहारा

कांवर यात्रा का प्रभाव सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देता है. सुलतानगंज से देवघर मार्ग पर जगह-जगह भोजन, पानी, दवा और विश्राम की व्यवस्था करने वाले सेवा शिविर सक्रिय हो गए हैं.

हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय दुकानदारों, भोजनालयों, परिवहन सेवाओं और छोटे कारोबारियों की आय में भी बढ़ोतरी होती है. सावन का महीना इस पूरे क्षेत्र के लिए आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण समय माना जाता है.

प्रशासन की चुनौती अभी बाकी

पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है. कांवरिया पथ, गंगा घाट, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो कच्चे कांवरिया पथ पर फिसलन और भीड़ नियंत्रण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

आगे और बढ़ेगी भीड़

श्रावणी मेला अभी शुरू हुआ है और आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है. खासकर सप्ताहांत और सावन के प्रमुख सोमवारों पर सुलतानगंज और देवघर मार्ग पर रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल सकती है.

फिलहाल सावन के पहले दिन का संदेश साफ है. यह यात्रा सिर्फ 98 किलोमीटर की दूरी तय करने की नहीं, बल्कि विश्वास, अनुशासन, समानता और सनातन परंपरा को जीने की यात्रा है.

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