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सीतामढ़ी जिला कल्याण कार्यालय में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। उन पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में रिश्वत मांगने का आरोप है। यह कार्रवाई बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान के निर्देश पर की गई है। यह मामला सोनबरसा थाना कांड संख्या-129/26 से संबंधित है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, सोनबरसा थाना क्षेत्र के कमलेश पासवान सहित आठ पीड़ितों को एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत एक-एक लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें प्रथम किस्त के रूप में 25-25 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था। शिकायतकर्ता कमलेश पासवान ने मंत्री के जनता दरबार में आरोप लगाया था कि अनुदान राशि जारी करने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। मंत्री ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और संबंधित कर्मी चंदन से फोन पर बात कराई। बातचीत के बाद मंत्री ने तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद, जिला कल्याण पदाधिकारी सुभाष चंद्र राजकुमार ने कार्यालय आदेश जारी कर डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार की सेवा समाप्त कर दी। आदेश में कहा गया है कि मंत्री के निर्देश के आलोक में उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाता है और बेल्ट्रॉन के माध्यम से उनकी सेवा वापस की जा सकती है। हालांकि, विभागीय अभिलेखों से यह भी पता चला है कि संबंधित कांड में स्वीकृत अनुदान की प्रथम किस्त का भुगतान 23 जुलाई 2026 को ही लाभुकों के खाते में भेज दिया गया था। बताया गया है कि राशि खाते में भेजे जाने के बावजूद शिकायतकर्ता के खाते में तत्काल क्रेडिट नहीं हुई थी, जिसके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। इस मामले को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। एक तरफ रिश्वत मांगने के आरोप में कार्रवाई की गई है, वहीं दूसरी तरफ भुगतान से जुड़े दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि राशि पहले ही जारी की जा चुकी थी।
