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भद्रघाट से कंगन घाट के बीच गंगा किनारे बसे 70 साल पुराने मकानों को टूटने से बचाने के लिए बुधवार को 200 से अधिक लोग पटना सिटी सीओ कुमार रवि के समक्ष उपस्थित हुए और अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान स्थानीय निवासी उदय कुमार राय ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा-हमारे दादा स्व. हजारी लाल यादव बांस का व्यापार करते थे। उस समय नदी ही व्यापार का साधन थी। उन्होंने जमीन खरीदकर सोनपुर में रजिस्ट्री कराई थी, जिसका दाखिल-खारिज भी हुआ है। आज उस जमीन पर हमारा पूरा परिवार घर बनाकर रह रहा है। इसी तरह केशव राय घाट निवासी राजकिशोर, दीनानाथ राय और बिंदेश्वर राय ने कहा कि 30 साल पहले उन्होंने 5 से 10 धूर जमीन खरीदकर आशियाना बनाया था। अब बच्चे बड़े हो गए हैं, बेटियों की शादी का वक्त है और ऐसे समय में मकान तोड़ने का नोटिस आ गया है। वहीं अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि जब तक यह जमीन सारण और वैशाली जिले में थी, तब तक कोई विवाद नहीं था, पटना जिले में आते ही इसे असर्वेक्षित घोषित कर दिया गया। अतिक्रमण मुक्त कराने के अभियान के तहत सीओ ने 259 मकान मालिकों को नोटिस जारी किया है। गंगा किनारे असर्वेक्षित भूमि पर कुल 313 पक्के मकान और बाउंड्री बनी हुई हैं। इनमें से 54 बाउंड्री बनाने वाले मालिकों का नाम-पता नहीं मिलने पर सीओ ने आम सूचना जारी कर दी है, ताकि वे भी अपना दावा पेश कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही कार्रवाई अशोक कुमार सिन्हा बनाम भारत सरकार मामले में 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया था। दस्तावेजों की जांच के बाद अंचलाधिकारी द्वारा अंतिम आदेश पारित किया जाएगा, जिसके बाद जिला प्रशासन बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त करेगा। इससे पहले पटना हाईकोर्ट के आदेश पर कच्ची झोपड़ियों को हटाया गया था, लेकिन पक्के मकान मालिक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे, जिससे कार्रवाई रुक गई थी।


