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मधेपुरा के रासबिहारी मंडल हाई स्कूल के नाम के आगे नया नाम जोड़े जाने के विरोध में बुधवार शाम शहर में मशाल जुलूस निकाला गया। रासबिहारी हाई स्कूल मैदान से शुरू हुआ जुलूस भूपेंद्र चौक तक पहुंचा। इसमें राजद नेता आनंद मंडल, राजेंद्र प्रसाद यादव, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव समेत बड़ी संख्या में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय की ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखने की मांग करते हुए सरकार के फैसले का विरोध जताया। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1956 में स्थापित रासबिहारी मंडल हाई स्कूल मधेपुरा की ऐतिहासिक धरोहर है। विद्यालय का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने किया था। लोगों ने कहा कि प्रखर स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी मंडल के नाम पर स्थापित इस विद्यालय के नाम के आगे नया नाम जोड़ना इसकी मूल पहचान को प्रभावित करेगा। ऐतिहासिक विद्यालयों के नाम बदलने पर विरोध आनंद मंडल ने कहा कि यदि सरकार मॉडल स्कूल खोलना चाहती है तो नए स्थान पर विद्यालय स्थापित करे, लेकिन वर्षों से संचालित ऐतिहासिक विद्यालयों के नाम के आगे नया नाम नहीं जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की विरासत और पहचान को अक्षुण्ण रखना समाज की जिम्मेदारी है। यह मशाल जुलूस युवाओं को अपनी विरासत और इतिहास के प्रति जागरूक करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के नाम पर स्थापित संस्थानों की पहचान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि रासबिहारी मंडल का नाम मधेपुरा के इतिहास और सम्मान से जुड़ा हुआ है। सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए विद्यालय के नाम के आगे नया नाम जोड़ने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक संस्थानों की मूल पहचान को बनाए रखना आवश्यक है। समाज से जुड़ी होती है शिक्षण संस्थान की पहचान एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान उसके इतिहास और समाज से जुड़ी होती है। विद्यालय के नाम के आगे नया नाम जोड़ने से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्र-युवा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने बिहार के 551 विद्यालयों को सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में कई विद्यालयों के नाम के आगे “सरस्वती विद्या निकेतन” जोड़ा गया है। इसी निर्णय के विरोध में मधेपुरा में मशाल जुलूस निकालकर विद्यालय की मूल पहचान बनाए रखने की मांग की गई।
