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मधुबनी के जयनगर प्रखंड की दुल्लीपट्टी पंचायत में घनी आबादी और प्राथमिक विद्यालय के बीच से प्रस्तावित 11 हजार वोल्ट (11 केवी) उच्चदाब विद्युत लाइन का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। शुक्रवार को हुई एक बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव क
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ग्रामीणों ने इस संबंध में विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, जयनगर के कार्यपालक अभियंता को एक आवेदन सौंपा है। इस आवेदन की प्रतियां अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी और ऊर्जा विभाग के सचिव को भी भेजी गई हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता
ग्रामीणों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित विद्युत लाइन का मार्ग घनी आबादी वाले क्षेत्रों, कई आवासीय मकानों, सार्वजनिक रास्तों और प्राथमिक विद्यालय के ठीक बीच से गुजर रहा है। इससे भविष्य में किसी भी समय गंभीर दुर्घटना होने का खतरा बना रहेगा।
उन्होंने विशेष रूप से विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। ग्रामीणों का तर्क है कि जनहित में इस मार्ग पर पुनर्विचार करना अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे बिजली आपूर्ति के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दुल्लीपट्टी दक्षिण क्षेत्र में जल्द और निर्बाध विद्युत आपूर्ति चाहते हैं। उन्होंने एक सुरक्षित और व्यवहारिक वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, छपराढ़ी से दुल्लीपट्टी दक्षिण तक चौर (खेत) के रास्ते एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है। इस मार्ग से लाइन ले जाने पर घनी आबादी और विद्यालय क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
प्रस्तावित मार्ग पर लगाने पड़ेंगे 100 विद्युत पोल
ग्रामीणों का दावा है कि वर्तमान प्रस्तावित मार्ग पर लगभग 80 से 100 विद्युत पोल लगाने पड़ेंगे, जबकि वैकल्पिक मार्ग से यह कार्य मात्र 15 से 20 पोल में पूरा हो सकता है। इससे सरकारी राशि की बचत होगी और विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
इसके अतिरिक्त, वैकल्पिक मार्ग से भविष्य में विद्युत लाइन के रखरखाव और मरम्मत कार्य में भी अधिक सुविधा मिलेगी।
ग्रामीणों ने कार्यपालक अभियंता से मांग की है कि विभागीय अभियंता स्थल निरीक्षण करें और ग्रामीणों की मौजूदगी में वैकल्पिक मार्ग का तकनीकी परीक्षण करें। उन्होंने विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए नए मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने की अपील की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
