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गिरिडीह जिले के प्रसिद्ध झारखंड धाम में सावन की दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों भक्त मंदिर परिसर पहुंचने लगे। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। झारखंड धाम राज्य के प्रमुख शिवधामों में से एक है। सुभाष पांडा ने बताया कि सावन माह में यहां झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह गिरिडीह शहर से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है। कांवरियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ विशेष रूप से, देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ में जलार्पण के बाद हजारों कांवरिये अपनी यात्रा पूरी करने के लिए झारखंड धाम पहुंचते हैं। वे यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। दूसरी सोमवारी पर भी कांवरियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झारखंड धाम का संबंध महाभारत काल से है। ऐसी मान्यता है कि इसी पवित्र भूमि पर अर्जुन ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और पाशुपत अस्त्र प्रदान किया था। यही कारण है कि यह स्थल शिवभक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इरगा नदी के तट पर लगभग 14 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत का संगम है। मंदिर परिसर हरियाली और शांत वातावरण से घिरा हुआ है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना फलदायी होती है झारखंड धाम की सबसे बड़ी विशेषता मंदिर परिसर में स्थापित दो शिवलिंग हैं। इनमें एक शंभू लिंग और दूसरा कामना लिंग के नाम से प्रसिद्ध है। श्रद्धालु दोनों शिवलिंगों का विधिवत जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि शंभू लिंग भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का प्रतीक है, जबकि कामना लिंग पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना फलदायी होती है। मंदिर का मुख्य शिवलिंग स्वयंभू अर्थात भुइफोड़ शिवलिंग माना जाता है। स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार यह शिवलिंग धरती को चीरकर स्वयं प्रकट हुआ था। इसके ऊपर कई बार मंदिर की छत बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। यही वजह है कि आज भी यह शिवलिंग खुले आसमान के नीचे विराजमान है, जिसे श्रद्धालु दिव्य चमत्कार के रूप में देखते हैं। पुलिस बल की विशेष व्यवस्था की गई सावन की दूसरी सोमवारी को लेकर मंदिर परिसर में प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, पेयजल, चिकित्सा सहायता, साफ-सफाई और पुलिस बल की विशेष व्यवस्था की गई थी। स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और युवाओं के साथ बड़ी संख्या में कांवरिये भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते रहे। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, राज्य की खुशहाली और देश की उन्नति की कामना करते हुए भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। आस्था, इतिहास, पौराणिक मान्यताओं और अद्भुत धार्मिक परंपराओं से समृद्ध झारखंड धाम आज भी लाखों शिवभक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां उमड़ने वाली भीड़ इस पवित्र धाम की बढ़ती धार्मिक महत्ता और लोगों की अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है।
