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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) अनियमितता मामले में जेल भेजे गए परीक्षा संचालक एजेंसी मेसर्स टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने सीआईडी की पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। अभय ने स्वीकार किया है कि जेपीएससी से पहले झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित सीजीएल (सीजीएल) परीक्षा का पेपर भी लीक कराया गया था। सीआईडी के समक्ष दिए गए अपने स्वीकारोक्ति बयान में अभय तिवारी ने बताया कि परीक्षा पास कराने के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपए की वसूली की गई थी। अकेले बोकारो के एक ठिकाने पर अभय तिवारी सहित 15 छात्रों को परीक्षा से पहले उत्तर रटवाए गए थे। इन 15 छात्रों से कुल 1 करोड़ 80 लाख रुपए की अवैध वसूली की गई थी। उत्तर रटवाते समय वेबेल कंपनी का मालिक मिथिलेश सिंह ल उसका सहयोगी राकेश सिंह भी मौजूद थे। टीडीपीएल डी-इंपैनल, फिर वेबेल से साठगांठ कर निकाला पर्चा अभय तिवारी के अनुसार, सीजीएल परीक्षा में बायोमीट्रिक का काम पहले उसकी कंपनी टीडीपीएल को दिया जा रहा था। लेकिन दर कम होने के कारण टीडीपीएल ने काम करने से मना कर दिया, जिसके बाद जेएसएससी ने टीडीपीएल को डी-इंपैनल कर दिया था। इसके बाद परीक्षा संचालन, बायोमीट्रिक और प्रश्न पत्रों की छपाई का काम वेबेल कंपनी को मिला, जिसका मालिक मिथिलेश सिंह और सहयोगी उमाकांत प्रमाणिक (खूंटी) है। अभय तिवारी ने इन दोनों से साठ-गांठ कर परीक्षा का गोपनीय प्रश्न पत्र और उत्तर हासिल कर लिया था। छात्रों का आरोप- अभय खुद बना बीएसओ, भाई-भौजाई भी सफल इधर, सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान अभ्यर्थियों ने अभय तिवारी के विरोध में उसके पोस्टर लेकर प्रदर्शन किए। अभ्यर्थियों ने उसके बारे में बताया कि अभय तिवारी ने स्वयं तो सीजीएल में सफलता हासिल की है। उसने अपने रिश्तेदारों को भी अधिकारी बनवाया। उसके भाई अक्षय तिवारी और भाभी सुषमा कुमारी का चयन भी इसी परीक्षा के जरिए हुआ। अभ्यर्थियों का आरोप था कि अभय तिवारी का साला, अभय तिवारी की भौजाई (सुषमा कुमारी), अभय तिवारी की साली, उपेंद्र मिश्रा जो अभय तिवारी का ममेरा भाई है, तेजनारायण पंडित अभय तिवारी के चाचा के साढ़ू का बेटा, बापी कुमार मिश्रा, बिक्रम पांडेय (अभय तिवारी के मौसा के भाई का बेटा), सुमित कुमार तिवारी (अभय तिवारी के बहनोई का भांजा) ने भी सफलता हासिल की। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग है कि दोषियों के चयन को रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

