Thursday, August 13, 2026

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क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई, सरकारी स्कूलों में छाता व स्थानीय रैयतों के अधिकार का मुद्दा सदन में उठा

कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने झारखंड विधानसभा के सदन में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधाओं तथा खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय रैयतों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विधायक ने सरकार से इन मामलों में स्पष्ट पहल और समय सीमा तय करने की मांग की। विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि राज्य सरकार भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए कई प्रावधान कर रही है। पूर्व में खड़िया, मुंडारी, हो सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों में होती थी, लेकिन वर्तमान में इनकी पढ़ाई सीमित महाविद्यालयों तक सिमट गई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि क्षेत्रीय भाषाओं को उनके भाषाई क्षेत्र के अनुरूप संबंधित महाविद्यालयों में पढ़ाने की सरकार की मंशा है, तो इसे कब तक लागू किया जाएगा। क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा में विस्तार हो। सरकारी स्कूलों के बच्चों को छाता देने की मांग : विधायक ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बच्चों को कॉपी, किताब, पोशाक, जूता-मोजा और स्वेटर आदि उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन गर्मी और बरसात के मौसम में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक छाता उपलब्ध नहीं कराया जाता। उन्होंने शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री से जानना चाहा कि क्या सरकार विद्यार्थियों को गर्मी और बरसात से बचाव के लिए छाता उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। यदि ऐसी योजना है तो उसे कब तक लागू किया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की। स्थानीय रैयतों को मिले खनन -औद्योगिक परियोजनाओं में उचित हक : विधायक ने खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित स्थानीय रैयतों के अधिकारों का मुद्दा भी सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई खनन एवं औद्योगिक परियोजनाएं बाहरी कंपनियों द्वारा संचालित की जा रही हैं, जबकि इन परियोजनाओं के लिए जमीन रैयतों से अधिग्रहित की जाती है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के माध्यम से कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत होती जा रही हैं, लेकिन अपनी जमीन और आजीविका गंवाने वाले स्थानीय रैयतों की स्थिति कई बार और खराब हो जाती है। जमीन अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को उनके अधिकार के अनुरूप लाभ, पुनर्वास और रोजगार का लाभ नहीं मिल पाता। नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने सरकार से मांग की कि समता जजमेंट और पेसा नियमावली 2025 के प्रावधानों के अनुरूप स्थानीय रैयतों को खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं में उचित हिस्सेदारी, बेहतर पुनर्वास तथा उनके अधिकारों का पूरा लाभ सुनिश्चित किया जाए।

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