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झारखंड के निर्यात कारोबार ने 2025-26 में राष्ट्रीय रफ्तार को पछाड़ते हुए बड़ी बढ़त हासिल की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में राज्य का निर्यात 30.90% (4995 करोड़) बढ़कर 20,988.14 करोड़ पर पहुंच गया। 2024-25 में यह आंकड़ा 16,034.19 करोड़ था। इसी अवधि में भारत की निर्यात वृद्धि महज 5.41% रही। झारखंड में यह देश की औसत रफ्तार से करीब छह गुना तेजी से बढ़ा है। इस प्रदर्शन के दम पर राज्य में राष्ट्रीय रैंकिंग में दो पायदान का सुधार किया है और 21वें से 19वें स्थान पर पहुंच गया है। इस निर्यात में बिजली की भूमिका सबसे अहम रही। अकेले बिजली का निर्यात 10.332 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा, जो राज्य के कुल निर्यात का 50% है। इसके अलावा गर्म रोल्ड स्टील, कपड़ा, जस्ती तार की रस्सियों और कुछ लौह इस्पात उत्पादों के निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज हुई, लेकिन मोटर पार्ट्स, फेरो मैंगनीज और स्टील की कुछ श्रेणियों के निर्यात में गिरावट आई। जिलेवार आंकड़ों में गोड्डा करीब 50% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि पूर्वी सिंहभूम और रांची क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर रहा। चार साल में 88% बढ़ा निर्यात (निर्यात करोड़ में) शीर्ष 10 जिलों की हिस्सेदारी 96.87%, रांची तीसरे नंबर पर 54.47 प्रतिशत निर्यात अकेले बांग्लादेश में किया जा रहा है मूल्यवर्धित उत्पादों और नए बाजारों पर जोर: रोहित अग्रवाल झारखंड चैंबर के महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि राज्य से विभिन्न वस्तुओं का निर्यात लगातार हो रहा है और इसमें सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। निर्यात वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात, नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश, उत्पादों में विविधता और बेहतर निर्यात अवसंरचना पर विशेष जोर देने की जरूरत है। झारखंड में उत्पादित बिजली का सीमापार निर्यात भी हो रहा है। गोड्डा स्थित अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र से उत्पादित बिजली की आपूर्ति बांग्लादेश को की जा रही है। बिजली और स्टील ने बढ़ाया निर्यात, बांग्लादेश में कपड़ा उत्पादन में कमी का मिला फायदा: टिबड़ेवाल झारखंड चैंबर के इंपोर्ट-एक्सपोर्ट सब कमेटी के चेयरमैन विवेक टिबड़ेवाल ने बताया कि बिजली का उत्पादन बढ़ा है और सेंट्रल एशिया में चल रहे युद्ध का इस पर खास असर नहीं पड़ा है। हॉट रोल्ड कॉइल के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कंटेनर के बढ़े हुए किराए के कारण मोटर पार्ट्स की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय उत्पादों को दूसरे देशों के उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। दूसरी ओर, बांग्लादेश में उत्पादन में कमी का लाभ झारखंड के कपड़ा निर्यातकों को मिला है। इसके कारण कपड़ों के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
