कृषि विज्ञान केंद्र में 50 किसानों को मिली ट्रेनिंग:बकली पालन की बारीकियों के बारे में जाना, नस्ल की भी दी गई जानकारी

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औरंगाबाद जिले के सीरिस स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में 50 प्रतिभागियों को 5 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण आर्या परियोजना के तहत आयोजित किया गया। केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार मंडल ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बताया कि आर्या परियोजना का उद्देश्य युवाओं को कृषि व संबद्ध व्यवसायों से जोड़ना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। इस योजना के माध्यम से खेती-किसानी को लाभकारी बनाकर युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गोट फार्मिंग का प्रशिक्षण अभी शुरू नहीं डॉ. मंडल ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र को 3 प्रमुख कॉम्पोनेंट दिए गए हैं। मशरूम पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन। मशरूम और मुर्गी पालन पर पूर्व में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। केंद्र में वेटरनरी वैज्ञानिक की अनुपलब्धता के कारण गोट फार्मिंग का प्रशिक्षण अब तक शुरू नहीं हो पाया था, लेकिन अब इसकी शुरुआत कर दी गई है। प्रशिक्षण के दौरान बकरी पालन के आर्थिक लाभ, कम लागत में अधिक मुनाफा और ग्रामीण परिवेश में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. मंडल ने कहा कि बकरी पालन गरीब और सीमांत किसानों के लिए आय का सशक्त माध्यम बन सकता है। राज्य में बकरी पालन की अपार संभावनाएं हैं और इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने बताया कि गाय-भैंस की तुलना में बकरी का दूध औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। विशेषकर डेंगू के बुखार में इसके दूध की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में किसान बकरी का दूध बेचकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।

प्रशिक्षण के बाद दिया जाएगा प्रमाण पत्र प्रशिक्षण में युवाओं को यह भी बताया गया कि दूध उत्पादन के लिए किस नस्ल की बकरी उपयुक्त होती है और मांस उत्पादन के लिए कौन-सी नस्ल बेहतर है। इसके साथ ही बकरियों के उचित आवास प्रबंधन, संतुलित आहार, टीकाकरण, सामान्य बीमारियों की पहचान और बचाव के उपायों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। डॉ. मंडल ने कहा कि यदि युवा वर्ग संगठित होकर इस व्यवसाय से जुड़े तो भविष्य में डेयरी और गोट फार्मिंग इकाइयों की स्थापना के लिए राज्य सरकार भी सहयोग करने को तत्पर है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इस प्रमाण पत्र के आधार पर वे सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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