मोतिहारी में 6 बीघा जमीन से जुड़े विवाद को लेकर पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। मोतिहारी पुलिस के मुताबिक, जमीन पर कब्जे के आरोप गलत हैं। इस जमीन के रिकॉर्ड पुराने हैं और दस्तावेजों की जांच में जमीन का ब्योरा वर्ष 1925 से द
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इस मामले की जांच के लिए चंपारण क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक ने 4 सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसने 5 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात ने हरेंद्र द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा, ‘यह मामला पूरी तरह से झूठा है। इस व्यक्ति ने जो शिकायत की है उसे पहले ही सुलझा लिया गया है।’

1925 से जमीन का रिकॉर्ड मिलने का दावा
जांच के मुताबिक, जमीन के मूल खातियानधारी कोलाई तेतवा के नाम से जमाबंदी कायम थी। रजिस्ट्री दस्तावेजों में वर्ष 1925 की जमीन का उल्लेख है। इसके बाद वर्ष 1932 में कोलाई तेतवा के तीन पुत्रों के नाम से जमाबंदी कायम होने की जानकारी मिली। वर्ष 1951 तक जमीन का लगान रसीद कटने का रिकॉर्ड भी पुलिस को मिला।
1991 और 1999 में बंटवारे का रिकॉर्ड
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1991 में जमीन का बंटवारा हुआ। इसके बाद वर्ष 1999 में भी जमीन के बंटवारे का उल्लेख है। वर्ष 2011 में जमीन के एक हिस्से के बंटवारे से जुड़ा रिकॉर्ड सामने आया। पुलिस के मुताबिक, वर्तमान में संबंधित जमीन की जमाबंदी विनोद तिवारी और हरेंद्र किशोर के नाम पर दर्ज है।
47 लाख रुपए के गबन का भी आरोप
हरेंद्र किशोर की ओर से जमीन को लेकर पूर्वजों के नाम से दर्ज जमीन पर अधिकार का दावा किया गया है। उन्होंने जमीन की बिक्री या नीलामी से इनकार किया है। मामले में 47 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाए जाने की बात भी पुलिस की जांच रिपोर्ट में दर्ज है।
पुलिस के मुताबिक, इस जमीन को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जांच कमेटी ने दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के आधार पर जमीन के स्वामित्व और लेन-देन से जुड़े तथ्यों को देखा गया है।
मोतिहारी के हरेंद्र बोले- 2024 से अधिकारियों के चक्कर लगा रहा हूं
मोतिहारी से पहुंचे हरेंद्र किशोर ने जमीन विवाद को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वह वर्ष 2024 से अपनी जमीन के मामले को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।

हरेंद्र किशोर ने लगाया था गंभीर आरोप
हरेंद्र किशोर ने आरोप लगाया, “पहले गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी थे, फिर सरदार जी भट्टी आए और अभी विनय कुमार हैं। डीजीपी और मोतिहारी के एसपी-डीएसपी के कब्जे में मेरी जमीन है।”
उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘खाकी वर्दी में पुलिस गुंडागर्दी जैसा व्यवहार कर रही है। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया था, लेकिन उन्हें अंदर तक नहीं जाने दिया गया।’

