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बेतिया के गांधी सभागार, बड़ा रमना में विकसित भारत जी-राम-जी के प्रावधानों की जानकारी देने के लिए एक पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में जिले की सभी पंचायतों के मुखिया, उपमुखिया, प्रखंड प्रमुख, उपप्रमुख, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य, विधायक, सांसद, कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायत रोजगार सेवक सहित कई अन्य कर्मी और अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम और राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद दीप प्रज्वलित कर इसका विधिवत उद्घाटन किया गया। गणमान्य अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया। निदेशक पुरुषोत्तम त्रिवेदी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को विकसित भारत जी-राम-जी के प्रावधानों से अवगत कराना है। ”विकसित भारत जी-राम-जी एक व्यापक योजना” उन्होंने कहा कि इसे विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने, रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने और आजीविका के साधन विकसित करने के उद्देश्य से नए स्वरूप में लागू किया गया है। त्रिवेदी ने जानकारी दी कि अब प्रत्येक परिवार को वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। इसके लिए मजदूरी दर 300 रुपये निर्धारित की गई है। योजना में कृषि कार्य के दौरान 60 दिनों की घोषित बंदी का भी प्रावधान है। भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है और योजना में निगरानी के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन ने बताया कि विकसित भारत जी-राम-जी एक व्यापक योजना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नया आयाम देगी। उन्होंने कहा कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा। रोजगार के साथ शिक्षा के विकास पर भी ध्यान देना जरूरी – रेणु देवी मुख्य अतिथि सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि इस कानून के प्रावधानों को लेकर संसद में व्यापक चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि इसके प्रावधान विकसित भारत की अवधारणा को साकार करने के साथ-साथ जल संरक्षण और जल संचयन को भी प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से योजना का पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। बेतिया विधायक और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा कि रोजगार के साथ शिक्षा के विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारीयों से पूछे सवाल योजना में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के विकास का प्रावधान है, इसलिए आवश्यकतानुसार ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सम्मेलन में चनपटिया, मझौलिया और सिकटा के कार्यक्रम पदाधिकारियों ने अनुमेय कार्यों, भुगतान प्रक्रिया तथा जल प्रबंधन एवं जल संचयन की जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों ने भुगतान में विलंब, बेरोजगारी भत्ता और कार्यान्वयन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने समाधान बताया। अंत में बिहार गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

