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तारापीठ होटल अग्निकांड: आंख खुली तो चारों तरफ था सिर्फ धुआं, जानें कमरे से कैसे सुरक्षित निकले लोग

तारापीठ (बीरभूम) से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

बीरभूम के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ में श्रावण महीने के अंतिम सोमवार की भोर एक दर्दनाक हादसे में बदल गयी. कौशिकी अमावस्या से ठीक पहले तारापीठ थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित ‘होटल विदेशिनी’ में भीषण आग लगने से अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. कई श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनका इलाज रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहा है. हादसे के बाद मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है.

भोर में मची चीख-पुकार, नींद में थे अधिकतर लोग

जानकारी के अनुसार, सोमवार 17 अगस्त 2026 की तड़के करीब 4:30 बजे होटल के ग्राउंड फ्लोर स्थित रिसेप्शन और बिजली के हिस्से में आग लगी. यह होटल जी+4 बहुमंजिला इमारत है. श्रावण के अंतिम सोमवार के कारण तारापीठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और होटल भी यात्रियों से लगभग भरा हुआ था. होटल मालिक के बेटे कल्याण पाल ने बताया कि करीब 4:30 बजे एसी के एनसीपी में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात सामने आयी. आग लगते ही नाइट गार्ड और एक अन्य कर्मचारी को इसकी जानकारी दी गयी.

तेजी से ऊपर की मंजिलों की ओर फैला घना धुआं

दोनों कर्मचारियों ने सबसे पहले बिजली की लाइन बंद करने की कोशिश की गयी और फायर अलार्म बजाया गया, ताकि कमरों में सो रहे श्रद्धालु सतर्क होकर बाहर निकल सकें. हालांकि, कुछ ही समय में स्थिति गंभीर हो गयी. आग के साथ निकला घना धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों की ओर फैल गया. होटल की फॉल्स सीलिंग, फाइबर और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग और धुआं तेजी से फैलने की बात सामने आयी है. कई श्रद्धालुओं को सांस लेने में परेशानी होने लगी और वे कमरों में फंस गये.

छह शव होटल से मिले, अस्पताल में सातवीं मौत

घटना की सूचना मिलते ही तारापीठ और रामपुरहाट थाने की पुलिस तथा दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं. दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और होटल के कमरों में फंसे लोगों को बाहर निकाला. तलाशी के दौरान पुलिस ने छह शव बरामद कर रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजे. बाद में अस्पताल सूत्रों से एक और मौत की पुष्टि होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गयी. कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कुछ की हालत गंभीर बतायी जा रही है.

‘आंख खुली तो चारों तरफ सिर्फ धुआं था’

हादसे में बाल-बाल बचे एक श्रद्धालु ने भयावह अनुभव सुनाते हुए बताया कि वे देर रात खाना खाने के बाद सो गये थे. सुबह करीब 4:30 बजे अचानक चीख-पुकार सुनकर उनकी आंख खुली. बाहर निकलने की कोशिश की तो चारों तरफ घना धुआं दिखाई दे रहा था. श्रद्धालु के मुताबिक, होटल कर्मचारियों की मदद से किसी तरह वे बाहर निकल सके. हालांकि, उन्होंने आग के कारण को लेकर कहा कि होटल प्रबंधन शॉर्ट सर्किट की बात कह रहा है, लेकिन होटल के निचले हिस्से में रसोई भी है.

“मां का अब तक पता नहीं चल पाया”

लोगों का कहना है कि होटल के रसोई से आग लगने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि वह खुद इसकी पुष्टि नहीं कर सकते. एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि वह कमरा नंबर एक में ठहरे थे. एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन उनकी मां का अब तक पता नहीं चल पाया है. उन्होंने बताया कि वे पिछले दिन बादुरिया से तारापीठ पहुंचे थे और उनके साथ दो बच्चे भी थे. बाहर निकलते समय धुएं के कारण वे गिर भी पड़े.

शॉर्ट सर्किट या कुछ और? जांच में जुटी टीम

प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है. होटल प्रबंधन ने भी एसी के एनसीपी में शॉर्ट सर्किट होने का दावा किया है. हालांकि, दमकल विभाग ने आग लगने के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है. तारापीठ के फायर ओसी नीलाद्रि मजूमदार के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर रिसेप्शन क्षेत्र से आग फैलने की जानकारी सामने आयी है. आग की शुरुआत कैसे हुई और इतनी तेजी से पूरे भवन में धुआं कैसे फैला, इसकी जांच की जा रही है. दमकल का दो इंजन मौके पर पहुंचा था.

आसपास के होटलों से भी पहुंचे लोग, बचाव में जुटे

आग की खबर फैलते ही आसपास के होटल और स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गये. लोगों ने अपने स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में मदद की. सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया. अग्निकांड के बाद पुलिस और दमकल की बड़ी टीम ने पूरे होटल परिसर को घेर लिया। सभी मंजिलों और कमरों की तलाशी ली गयी, ताकि कोई अन्य व्यक्ति अंदर फंसा न रह गया हो.

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कौशिकी अमावस्या से पहले तारापीठ में मातम

तारापीठ में कौशिकी अमावस्या को लेकर पहले से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी है. ऐसे समय में श्रद्धालुओं से भरे होटल में हुआ यह भीषण अग्निकांड पूरे इलाके के लिए गहरा सदमा है. हादसे ने होटल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, बिजली के इंतजाम और आपातकालीन निकासी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. पुलिस-प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है.मृतकों की पहचान और हादसे के अन्य पहलुओं की पड़ताल जारी है. भोर की उस भयावह आग ने तारापीठ की धार्मिक आस्था के बीच ऐसा दर्द छोड़ दिया है, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा.

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