JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने से नौकरी से हटाए गए अधिकारी शुक्रवार को भी धरने पर हैं। वो लगातार जेएसएससी सीजीएल रद्द वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
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उन्होंने गुरुवार को दिनभर प्रोजेक्ट भवन के सामने धरना दिया और शाम को मोरहाबादी से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाला।
वहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। गुरुवार को सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्तियां रद्द करने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी है।
17 अगस्त को राज्य सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द की थी
झारखंड सरकार ने JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के चलते 17 अगस्त को 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।
इनमें JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। जांच CID को सौंप दी गई है।
इन परीक्षाओं के आधार पर 2394 अधिकारी विभिन्न विभागों में कार्यरत थे। सरकार के फैसले के बाद इन सभी अधिकारियों की नियुक्तियां समाप्त मानी जाएंगी।

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के छात्रों ने गुरुवार की रात प्रेसवार्ता की।
आज सभी जिलों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन: छात्र नेता वहीं, जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के कुणाल ने प्रेसवार्ता कर कहा-सरकार के तरफ से हाईकोर्ट में इतने महत्वपूर्ण केस की सुनवाई में ना तो सरकार के महाधिवक्ता शामिल हुए और ना ही कोई बड़ा वकील। सरकारी वकील ने एक शब्द भी नहीं कहा।
उन्होंने कहा- अगर सरकार की मंशा सही होती तो आज एक अच्छा वकील कोर्ट में उन बातों को डिफेंड करने के लिए उपस्थित होता। सरकार को कोर्ट में बताना चाहिए था कि परीक्षाओं को किन कारणों से रद्द किया गया था। ये तो छात्रों के साथ धोखा है। ये साबित करता है सरकार की मंशा सही नहीं थी। झारखंड के छात्रों के साथ धोखा हुआ है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के रविंद्र पासवान ने कहा- हमें लगा सरकार की मंशा सही है और दो माह के लिए अपना आंदोलन स्थगित किया। लेकिन आज जो भी हाईकोर्ट में हुआ, इससे समझ में आया कि सरकार ने हमें धोखा दिया है।
उन्होंने कहा- सरकार की मंशा सिर्फ आंदोलन खत्म करवाना था। सरकार ने जो कमिटमेंट किया है, वो दिखना चाहिए। वरना हम दो माह के पहले ही आंदोलन छेड़ देंगे, जो काफी व्यापक होगा। कल 24 जिले में मुख्यमंत्री का पुतला दहन होगा।

परीक्षाएं रद्द होने के खिलाफ प्रदर्शन

नौकरी से हटाए गए अधिकारी जेएसएससी सीजीएल रद्द वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

सीजीएल नियुक्ति रद्द होने से नौकरी से हटाए गए अधिकारी डीसी से आंदोलन के लिए जगह देने की मांग कर रहे हैं।

नौकरी से हटाए गए अधिकारियों ने गुरुवार की शाम मोरहाबादी से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली।
अन्य परीक्षाओं का मामला भी कोर्ट जाएगा
- राज्य सरकार ने 22 नियुक्ति परीक्षा रद्द कर दी थी। 23 परीक्षाओं की जांच सीआईडी को सौंपने की अधिसूचना जारी की थी। इसके खिलाफ अब अभ्यर्थी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। सीडीपीओ सहित अन्य अभ्यर्थी भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
- उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आंदोलन करना सभी का अधिकार है। सरकार ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कभी सख्ती नहीं बरती। अब जेएसएससी-सीजीएल के सफल अभ्यर्थी भी धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्रों की 5 मांगें, सरकार को अल्टीमेटम
वहीं, 26 दिन तक चले आंदोलन के बाद 19 अगस्त को छात्रों ने दो माह के लिए अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। छात्रों ने सरकार के सामने 5 प्रमुख मांगें रखीं और सरकार को 2 महीने का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
- 1. उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के फिजिकल टेस्ट के दौरान मृत अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग।
- 2. विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए केस वापस लिए जाएं।
- 3. परीक्षा सुधार को लेकर अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
- जेएसएससी पीजीटी, नगर पालिका, माध्यमिक आचार्य, लैब असिस्टेंट और एक्साइज कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द कर नए सिरे से कराया जाए।
- सीआईडी जांच के मामले में सरकार से जल्द याचिका दायर कर कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखे।
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