Tuesday, August 25, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

सहरसा में डॉल्फिन शिकार का मुख्य आरोपी गिरफ्तार:पुलिस और वन विभाग ने जॉइंट एक्शन में बीरेन्द्र मुखिया को पकड़ा


सहरसा के डरहार थाना क्षेत्र में कोसी नदी में राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन के अवैध शिकार मामले में पुलिस और वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त टीम ने जॉइंट एक्शन करते हुए मुख्य आरोपी बीरेन्द्र मुखिया को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अभियुक्त डरहार गांव निवासी सरयुग मुखिया का बेटा है। गांगेय डॉल्फिन के शिकार से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. वीडियो में तेल निकालने की बात कहते देखा गया सहरसा सदर प्रभारी एसडीपीओ ओमप्रकाश ने मंगलवार शाम को इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले कोसी नदी जलक्षेत्र में डॉल्फिन के अवैध शिकार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में मछुआरों को जाल में फंसी डॉल्फिन को नाव पर लादकर ले जाते और उसका तेल निकालने की बात कहते देखा गया था। वीडियो का संज्ञान लेते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। वन विभाग द्वारा नामजद प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद, सहरसा पुलिस और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। गांगेय डॉल्फिन भारत का ‘राष्ट्रीय जलीय जीव’ – एसडीपीओ डरहार थाना पुलिस के सहयोग से टीम ने मुख्य आरोपी बीरेन्द्र मुखिया को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अन्य संबंधित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एसडीपीओ ओमप्रकाश ने बताया कि गांगेय डॉल्फिन भारत का ‘राष्ट्रीय जलीय जीव’ है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत बाघ और शेर की तरह ही सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसका शिकार करना एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों और जलीय जीवों के अवैध शिकार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सहरसा पुलिस पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गिरफ्तार अभियुक्त को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। इस घटना के बाद, कोसी नदी क्षेत्र में जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग और पुलिस द्वारा गश्त बढ़ा दी गई है। अब जानिए गांगेय डॉल्फिन के बारे में गांगेय डॉल्फिन, जिसे आम बोलचाल में गंगा नदी डॉल्फिन कहते हैं। बिहार और उत्तर भारत में इसे सोंस या सुसु कहा जाता है। ‘सुसु’ नाम को इसकी सांस लेने के दौरान निकलने वाली आवाज से जोड़ा जाता है। भारत की नदियों में पाई जाने वाली ये दुर्लभ स्तनपायी प्रजाति है। बिहार गांगेय डॉल्फिन के लिए देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। भागलपुर में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य (VGDS) है। यह गंगा नदी के सुल्तानगंज से कहलगांव तक लगभग 60 किलोमीटर के हिस्से में फैला है। इसे 1991 में डॉल्फिन संरक्षण के लिए अधिसूचित किया गया था। यह भारत का एकमात्र विशेष डॉल्फिन अभयारण्य है। 2–3 साल में एक बच्चे देती है डॉल्फिन गांगेय डॉल्फिन का प्रजनन बहुत तेज नहीं होता। मादा आम तौर पर एक बच्चे को जन्म देती है और दो बच्चों के बीच अंतर लगभग 2–3 साल तक हो सकता है। गंगेय डॉल्फिन के शिकार का पूरी प्रोसेस समझिए यही वजह है कि अगर किसी इलाके में डॉल्फिन की बड़ी संख्या में मौत हो जाए तो उसकी आबादी को वापस सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है। राष्ट्रीय जलीय जीव है गांगेय डॉल्फिन गांगेय डॉल्फिन को 5 अक्टूबर 2009 को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। यह निर्णय राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की पहली बैठक में लिया गया था। इसका उद्देश्य डॉल्फिन के साथ-साथ नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर जोर देना था। बिहार में गांगेय डॉल्फिन की स्थिति देश के कई दूसरे हिस्सों की तुलना में बेहतर है, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। सबसे ताजा राष्ट्रव्यापी आकलन 2021-23 का है, जिसे 2024 में प्रकाशित किया गया। इसमें बिहार में 2,220 गांगेय डॉल्फिन का अनुमान लगाया गया। यह भारत में किसी भी राज्य का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles