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भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गी है। तिलकामांझी विश्वविद्यालय के पीछे स्थित दियारा क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने करीब 30 हजार की आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी है। शंकरपुर, चौवनिया, दारापुर, रत्तीपुर, बैरिया, अजमेरीपुर समेत आसपास के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई घरों तक पानी पहुंचने के बाद लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों की जिंदगी अब नाव के सहारे चल रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में आने-जाने के लिए ग्रामीणों के पास नाव के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। सड़क और संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने के कारण रोजमर्रा के काम के लिए भी लोगों को काफी परेशानी हो रही है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित जगह की तलाश में निकल चुके हैं। ‘5 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा है’ स्थानीय महिला सुनीता देवी ने बताया कि टीएमबीयू परिसर की ओर से आने-जाने वाले कई रास्तों और गेटों को बंद कर दिया गया है। रास्ता बंद होने से उकरीब पांच किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति में यह दूरी उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई है। खासकर आपात स्थिति में मरीजों और जरूरतमंदों को अस्पताल या अन्य सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना चुनौती है। ग्रामीण राजेश कुमार ने बताया कि टीएनबी कॉलेजिएट मैदान उनके लिए लंबे समय से आपदा की स्थिति में सुरक्षित और ऊंचा स्थान रहा है। बाढ़ आने पर आसपास के लोग यहां शरण लेते रहे हैं। सोमवार रात भी कुछ बाढ़ पीड़ित परिवार अस्थायी रूप से यहां पहुंचे थे। मंगलवार और बुधवार सुबह बड़ी संख्या में लोग मवेशी और घरेलू सामान लेकर मैदान की ओर पहुंचे। लेकिन उन्हें मैदान में प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद मौके पर विरोध शुरू हो गया। बताया गया कि नगर निगम की ओर से टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में पार्क निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के कारण मैदान में प्रवेश रोकने का प्रयास किया गया। इसी बात को लेकर बाढ़ पीड़ितों और संवेदक के बीच कहासुनी भी हुई। सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने की मांग ग्रामीण सुनील मंडल का कहना था कि जब उनके घर बाढ़ के पानी में डूब रहे हैं और रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है, तो उन्हें मैदान में शरण लेने से नहीं रोका जाना चाहिए। नगर निगम के अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई है। दूसरी ओर शंकरपुर पंचायत के मुखिया ने नाथनगर के सीओ को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति से अवगत कराया। हर वर्ष बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर शिविर लगाने की व्यवस्था की जाती है। इस बार भी बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जरूरत है। नाव चलाने की मांग बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर राहत शिविर बनाया जाए। साथ ही नावों की संख्या बढ़ाई जाए और विश्वविद्यालय व आसपास के क्षेत्रों में बंद रास्तों के कारण लोगों को हो रही परेशानी का समाधान किया जाए।
