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सहरसा में पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) की बहाली की मांग को लेकर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ,जिला शाखा सहरसा के कर्मचारियों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद महासंघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि बिहार सरकार ने 1 सितंबर 2005 से पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर नई अंशदायी पेंशन योजना (एनपीएस) लागू की थी। इसी के विरोध में कर्मचारी और शिक्षक समुदाय हर साल 1 सितंबर को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाता है। महासंघ ने इस अवसर पर एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को तत्काल बहाल करने की मांग दोहराई। राज्य सरकार से सकारात्मक फैसला लेने की उम्मीद ज्ञापन सौंपने के बाद महासंघ के जिला मंत्री शरद कुमार ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी अपने जीवन के लगभग 40 साल सरकार और समाज की सेवा में समर्पित करते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका अधिकार है, न कि कोई सरकारी कृपा। शरद कुमार ने यह भी बताया कि कई राज्यों ने अपने कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का निर्णय लिया है। बिहार के लाखों कर्मचारी और शिक्षक भी राज्य सरकार से इसी तरह का निर्णय लेने की उम्मीद कर रहे हैं। शरद कुमार ने मौजूदा एनपीएस व्यवस्था को बाजार आधारित और असुरक्षित बताया। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग भी की उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन से 10 प्रतिशत और सरकार के 14 प्रतिशत अंशदान के रूप में बड़ी राशि पेंशन फंड में जमा की जा रही है। कर्मचारियों ने मांग की है कि पेंशन फंड में जमा इस राशि को बिहार सरकार के खाते में वापस मंगाया जाए। महासंघ की प्रमुख मांगों में एनपीएस को समाप्त कर ओपीएस की तत्काल बहाली शामिल है। इसके अतिरिक्त, पेंशन अधिकारों की सुरक्षा के लिए PFRDA कानून को समाप्त करने हेतु बिहार सरकार द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग भी की गई है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों और शिक्षकों की मांगों पर सरकार ने सकारात्मक और ठोस पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों का प्रोटेस्ट:सहरसा में DM के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा मेमोरैंडम
