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माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी तेज कर दी है। राज्य सरकार ने अपने संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने से पहले सभी कानूनी पक्षों पर सरकार ने महाधिवक्ता से राय मांगी थी। महाधिवक्ता ने अपनी राय सरकार को सौंप दी है। कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम उक्त एक्ट से जुड़े दस्तावेज और संवैधानिक प्रावधानों का कई दिनों तक अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट तैयार की है। इसमें खनिज संसाधनों पर राज्यों के अधिकार, राजस्व हिस्सेदारी और केंद्र-राज्य शक्तियों के बंटवारे से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या विस्तृत रूप से की गई है। अब राज्य सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी। मालूम हो कि खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी, कर निर्धारण और खनन पट्टों से जुड़े अधिकारों पर केन्द्र और राज्य सरकार के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। इस मामले में राज्य सरकार का तर्क है कि खनिज संपदा उसके क्षेत्र में स्थित है। इसलिए उससे मिलने वाले राजस्व में राज्य के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
झारखंड में एमएमडीआर एक्ट का विरोध:महाधिवक्ता ने दी राय, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में सरकार
