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राज्य में एक तरफ राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों के भोजन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पहले थाली से अंडा गायब हुआ, फिर खिचड़ी बंद हुई और अब बच्चे केवल बिस्कुट पर निर्भर हैं। राजधानी के शिव दुर्गा मंदिर स्थित केंद्र पर पिछले 8 महीने से पोषाहार राशि बकाया रहने के कारण दोपहर का भोजन पूरी तरह बंद है। यहां सेविका बसंती कुजूर ने लगभग 15 बच्चों को सिर्फ बिस्कुट बांटकर घर भेज दिया। उन्होंने बताया कि पोषाहार का पैसा लगातार पेंडिंग रहने की वजह से केंद्र का संचालन मुश्किल हो गया है। जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, खाना नहीं बन सकेगा। सेविका बोलीं- कब तक अपनी जेब से बच्चों को खाना खिलाएं
वीडियो में स्थिति बयां करते हुए आंगनबाड़ी कर्मी ने कहा कि बाजार में राशन और जरूरी सामानों के दाम काफी बढ़ चुके हैं, जबकि उस अनुपात में उन्हें समय पर पैसा नहीं मिलता। पिछले दो से तीन महीनों से मानदेय/ पोषाहार मद में कोई राशि नहीं मिली है। ऐसे में वे कब तक और कहां से अपनी जेब लगाकर व्यवस्था चलाएं। उन्होंने बताया कि उच्च स्तर से भी अब भोजन बंद रखने की ही बात है। सेविका ने बताया कि सभी को दिक्कत हो रही है। सेविका ने अपने खर्च से खिलाया हलवा
रातू रोड (खादगढ़ा) केंद्र में मानवीयता की मिसाल दिखी। यहां सेविका यमुना देवी ने गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के बच्चों को भूखा नहीं रहने दिया। उन्होंने अपने निजी खर्च से हलवा बनाकर बच्चों को पत्तों (दोने) में परोसा। उन्होंने कहा कि मजदूर माता-पिता काम पर जाते समय बच्चों को यहीं छोड़ जाते हैं, ऐसे में वे उन्हें भूखा कैसे देख सकती हैं। ट्रेजरी में बिल, स्पर्श प्रणाली के चलते देरी
राशि जारी कर दी गई है। भुगतान से जुड़े बिल ट्रेजरी में उपलब्ध हैं। एसएनए-स्पर्श प्रणाली के तहत भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी समय लगने के कारण कर्मियों के बैंक खातों में राशि पहुंचने में देरी हो रही है। – किरण पासी, निदेशक, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग
पोषण सप्ताह में ही बच्चों का खाना बंद:अब बिस्किट पर आंगनबाड़ी, सेविका बोलीं- 8 माह से फंड नहीं मिला; जब तक राशि नहीं मिलेगी तब तक नहीं बनेगा खाना
