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झारखंड में मानसून के दौरान कई जिलों में हो रही तेज बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से डूबने का खतरा बढ़ गया है। राज्य की छोटी नदियों में अचानक तेज बहाव के साथ पानी बढ़ने से स्थिति काफी भयावह हो जाती है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न कारणों से 951 लोगों की पानी में डूबने से मौत हुई है। सबसे ज्यादा गढ़वा में 71 और लोहरदगा में 70 मौतें हुई हैं। 2024-25 में लोहरदगा में सबसे ज्यादा 37, 2025-26 में गढ़वा में 50 और 2026-27 में अगस्त तक जमशेदपुर में सबसे ज्यादा 16 लोगों के डूबने से मौत हुई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित परिवारों को प्रति मृतक 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है। इस तरह तीन वर्षों में आपदा प्रबंधन विभाग ने 951 मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए के हिसाब से कुल 38 करोड़ 4 लाख रुपए का भुगतान किया है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में 324, 2025-26 में 499 और 2026-27 में अगस्त तक 128 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इन मौतों में बाढ़ या नदियों में डूबने के साथ-साथ तालाब और डोभे में डूबने की घटनाएं भी शामिल हैं। तीन साल में हर दिन औसतन एक की मौत डूबने से मौतों में 54 प्रतिशत का इजाफा
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पानी में डूबने से 324 मौतें हुई थीं। अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 499 हो गया। यानी एक साल में 175 अधिक मौतें हुईं। यह करीब 54% की वृद्धि है। हालांकि, 2026-27 के आंकड़े अभी सिर्फ अगस्त तक के हैं। इस साल 3 जिलों में ही 46 की जा चुकी है जान
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक पानी में डूबने से हुई 128 मौतों में जमशेदपुर में 16, गढ़वा में 15 और हजारीबाग में 15 मौतें हुई हैं। इन तीन जिलों में ही 46 मौतें हुईं, जो इस अवधि में हुई कुल मौतों का करीब 36% है। इसके बाद सिमडेगा में 11, रामगढ़ में 10 और धनबाद में 9 लोगों की जान गई है। तीन साल में जिलेवार मौतें (2026-27 का आंकड़ा अगस्त तक)
झारखंड में 3 साल में 951 लोग डूबे:सिर्फ गढ़वा में 71 की गई जान, मृतक के परिजनों को 3 साल में 38.04 करोड़ का भुगतान

