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नालंदा डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस ऑथोरिटी की ओर से 12 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से बिहारशरीफ और हिलसा सिविल कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। लोक अदालत में आम नागरिकों के पास वर्षों से लंबित मुकदमों और पूर्व-मुकदमेबाजी वाले सुलह योग्य मामलों से मुक्ति पाने का सुनहरा अवसर होगा। इस बार ट्रैफिक चालानों के सुगम और त्वरित निपटारे पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बिहारशरीफ सिविल कोर्ट के जज सह जिला विधिक सेवा पदाधिकारी सचिव, राजेश कुमार गौरव ने बताया कि ट्रैफिक चालानों के निष्पादन के लिए 7 सितंबर से ही डीटीओ कार्यालय और ट्रैफिक डीएसपी कार्यालय में ‘प्री-रजिस्ट्रेशन हेल्प डेस्क’ स्थापित कर दिया गया है। जज गौरव ने आमजनों से अपील करते हुए कहा है कि 12 सितंबर से पहले हेल्प डेस्क पर जाकर अपने ट्रैफिक चालान से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। वहां वे जान सकेंगे कि उन पर कितने प्रकार के चालान हैं, उन्हें कितनी राशि देनी है और लोक अदालत में उन्हें कितनी छूट मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्री-सिटिंग के जरिए चालान राशि संशोधित करवा लेने से 12 सितंबर को लोक अदालत के दिन लोगों को भारी सहूलियत होगी और कम से कम समय में उनका निष्पादन हो जाएगा। जागरूकता के लिए 4 गाड़ियां रवाना राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशांत कुमार ने चार जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये गाड़ियां जिले के विभिन्न क्षेत्रों में घूमकर लोगों को लोक अदालत के फायदों के बारे में जागरूक करेंगी। न्यायाधीश सुशांत कुमार ने आम जनता से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस लोक अदालत में भागीदारी करें और अपने लंबित वादों तथा यातायात चालानों का निपटारा कराएं। लोक अदालत में निपटाए जाने वाले मुख्य मामले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, इस लोक अदालत में निम्नलिखित पूर्व-मुकदमेबाजी और लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा। इनमें एलआईसी, बैंक ऋण संबंधी विवाद, श्रम विवाद, बिजली और पानी के बकाया बिल, पारिवारिक विवाद, भूमि अधिग्रहण के मामले, वेतन-भत्ते व सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े सेवा संबंधी मामले और अन्य दीवानी/आपराधिक सुलह योग्य मामले, न्यायालयों में लंबित समझौता योग्य आपराधिक मामले और एनआई एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) से जुड़े मामले शामिल होंगे। लोक अदालत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि यहां किसी दीवानी मामले का निपटारा आपसी सुलह से हो जाता है, तो पूर्व में जमा की गई कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है। इसके अलावा, लोक अदालत की ओर से सुनाए गए फैसले अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ किसी अन्य अदालत में अपील दायर नहीं की जा सकती है। प्राधिकरण ने जिलेवासियों से इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर समय व धन की बचत करने का आग्रह किया है।
नालंदा में 12 सितंबर को सुलझाए जाएंगे पेडिंग केस, चालान:प्री-रजिस्ट्रेशन हेल्प डेस्क शुरू, जज ने आम लोगों से लाभ उठाने की अपील की
