बोकारो | जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा की ओर से पर्युषण पर्व के चौथे दिन शुक्रवार को वाणी संयम दिवस मनाया गया। चास स्थित माणिक चंद छल्लानी के आवास पर आयोजित प्रवचन सत्र में उपासिका शांति गुजरानी और सहयोगिनी निहारिका सिंघी ने वाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संयमित, मधुर और शालीन भाषा के प्रयोग का संदेश दिया। उपासिका शांति गुजरानी ने कहा कि वाणी व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान होती है। वाणी पर संयम नहीं होने पर धार्मिक कर्म भी सार्थक नहीं हो पाते। इसलिए परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए और कठोर शब्दों से बचना चाहिए। निहारिका सिंघी ने कहा कि बोलने से पहले शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। खान-पान के साथ वाणी में भी संयम जरूरी है। जीभ से अमृत भी निकल सकता है और विष भी, इसलिए विवेकपूर्ण और मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए।

