मधेपुरा व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें जिले के करीब 9500 मामलों को निपटारे के लिए चिह्नित किया गया है।
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इनमें करीब 4500 प्री-लिटिगेशन और 5000 पोस्ट-लिटिगेशन मामले शामिल हैं। मामलों का अधिक से अधिक आपसी सहमति से निपटारा कराने के लिए मधेपुरा में 10 और उदाकिशुनगंज में 4 बेंच बनाई गई हैं।
प्रभारी जिला जज-अधिकारियों ने किया उद्घाटन
राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन प्रभारी जिला जज सतीश कुमार, डीडीसी अरुण कुमार, डीएलएसए की सचिव पूजा कुमारी साह, एएसपी मुख्यालय नेसार अहमद और जिला अधिवक्ता संघ के सचिव गणेश प्रसाद समेत अन्य अधिकारियों ने किया।
इस दौरान अधिकारियों ने लोक अदालत के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा कराने पर जोर दिया।

पिछली लोक अदालत से दो-तीन गुना निपटारे की उम्मीद
डीएलएसए की सचिव पूजा कुमारी साह ने बताया कि मधेपुरा में 10 और उदाकिशुनगंज में 4 बेंच के जरिए मामलों की सुनवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पोस्ट-लिटिगेशन के करीब 5100 मामलों की पहचान की गई थी। इस बार पिछली लोक अदालत की तुलना में दो से तीन गुना अधिक मामलों के निपटारे की संभावना है।
ट्रैफिक चालान के लिए अलग काउंटर
लोक अदालत में ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए अलग काउंटर बनाया गया है। इसके लिए मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर कार्यालय में 8 सितंबर से प्री-रजिस्ट्रेशन बूथ भी बनाया गया था। जिन लोगों ने पहले से प्री-रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे लोक अदालत के दिन निर्धारित काउंटर पर पहुंचकर अपने चालान का निपटारा करा सकते हैं।
बैंक लोन के मामलों में भी समझौते का मौका
राष्ट्रीय लोक अदालत में अलग-अलग बैंकों से लिए गए कर्ज से जुड़े मामलों का भी आपसी समझौते के आधार पर निपटारा किया जाएगा। मधेपुरा और उदाकिशुनगंज में ट्रैफिक चालान के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है, ताकि संबंधित मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके।
समय और पैसे दोनों की होती है बचत
प्रभारी जिला जज सतीश कुमार ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निपटारा होने से लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत होती है। आपसी सहमति से विवाद खत्म होने पर पक्षकारों के बीच संबंध भी बेहतर बने रहते हैं।
उन्होंने लोक अदालत से संबंधित नोटिस प्राप्त करने वाले लोगों से अपील की कि वे निर्धारित तारीख को न्यायालय परिसर पहुंचें और आपसी सहमति के आधार पर अपने मामलों का निपटारा कराने का प्रयास करें।

