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11 घंटे पहले
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अभी गणेश उत्सव चल रहा है और इन दिनों में भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, बिल्व पत्र, शमी पत्ते और लाल फूल विशेष प्रिय माने जाते हैं, लेकिन गणेश पूजन में तुलसी अर्पित नहीं की जाती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौराणिक कथा है कि पुराने समय में तुलसी भगवान गणेश से विवाह करना चाहती थीं। उन्होंने गणपति से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन गणेश जी ने विवाह का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
गणेश जी द्वारा विवाह से इनकार करने पर तुलसी क्रोधित हो गईं और उन्होंने गणेश जी को दो विवाह होने का शाप दे दिया। तुलसी के इस शाप से गणेश जी भी क्रोधित हो गए। उन्होंने तुलसी को शाप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा।
गणेश जी के इस शाप से तुलसी दुखी हो गईं और उन्होंने अपने व्यवहार के लिए गणेश जी से क्षमा मांगी। तब गणेश जी ने कहा कि तुलसी का विवाह शंखचूर्ण नामक असुर से होगा। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय होंगी और विष्णु पूजा में उनका विशेष महत्व रहेगा, लेकिन मेरी पूजा में तुलसी वर्जित रहेगी। इसी पौराणिक कथा के आधार पर गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं करने की परंपरा है।
गणेश पूजा में किन चीजों का करें इस्तेमाल
गणेश जी की पूजा में स्वच्छ जल, वस्त्र, तिलक के लिए रोली या चंदन, लाल फूल, दूर्वा, धूप, दीप और नैवेद्य रखा जा सकता है। भगवान गणेश को मोदक और घर में बने अन्य मीठे व्यंजनों का भोग लगा सकते हैं। पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा
रोज सुबह जल्दी उठें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को स्वच्छ कर भगवान गणेश की पूजा करें। सबसे पहले गणेश जी को स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें वस्त्र अर्पित करें और तिलक लगाएं। सामर्थ्य के अनुसार आभूषण या अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। भगवान गणेश को दूर्वा और फूल अर्पित करें। घर में बने मीठे व्यंजन या मोदक का भोग लगाएं। धूप और दीप जलाकर गणेश जी की आरती करें। पूजा के बाद भगवान की परिक्रमा करें और श्री गणेशाय नम:, ॐ गं गणपतये नम: मंत्र का जप करें। पूजा के अंत में जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद बांटें और खुद भी लें।



