Sunday, September 20, 2026

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खाद्य सुरक्षा विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा:पटना में 10×15 फीट के कमरे में दफ्तर, 7 जिलों का जिम्मा एक अधिकारी पर


पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग खुद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विभाग के पास न तो पर्याप्त दफ्तर है, न जरूरत के मुताबिक अधिकारी-कर्मचारी और न ही सैंपल सुरक्षित रखने की पूरी व्यवस्था। विभाग के अधिकारी करीब 10×15 फीट के एक छोटे कमरे में दफ्तर चला रहे हैं। संसाधनों की कमी के कारण खाद्य संरक्षा विभाग के लिए पदार्थों की नियमित जांच करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इससे मिलावटखोरों पर ठीक से लगाम नहीं लग पा रही है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। पटना में एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी, 6 अन्य जिलों का भी प्रभार पटना जिले में फिलहाल एक खाद्य संरक्षा अधिकारी तैनात हैं। उनके पास पटना के अलावा नालंदा, भोजपुर, बक्सर, अरवल, रोहतास और कैमूर का भी अतिरिक्त प्रभार है। यानी एक अधिकारी के जिम्मे कुल 7 जिलों की जिम्मेदारी है। खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, सैंपलिंग, शिकायतों पर कार्रवाई और जब्त सामग्री की निगरानी जैसे कामों के लिए लगातार फील्ड में जाना पड़ता है। ऐसे में सभी कार्रवाई का जिम्मा अकेले एक अधिकारी पर है, जिससे नियमित जांच कर पाना बहुत मुश्किल हो गया है। 6 रेफ्रिजरेटर की जरूरत, उपलब्ध सिर्फ एक खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने के बाद उन्हें सही परिस्थितियों में सुरक्षित रखना जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। पटना जैसे बड़े शहर के लिए करीब 6 रेफ्रिजरेटर की जरूरत है, लेकिन विभाग के पास सिर्फ एक रेफ्रिजरेटर है। यह भी कई बार खराब हो जाता है। ऐसे में अलग-अलग तरह के खाद्य नमूनों को सही तापमान और परिस्थितियों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। सीज खाद्य सामग्री रखने के लिए पर्याप्त वेयरहाउस नहीं खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान कई बार खाद्य सामग्री जब्त की जाती है। ऐसी सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए सही स्टोरेज की जरूरत होती है। लेकिन पटना में जब्त किए गए खाद्य पदार्थों को रखने के लिए पर्याप्त वेयरहाउस की सुविधा नहीं है। यह भी विभाग की बड़ी समस्याओं में से एक है। एक अधिकारी के जिम्मे 7 जिले, वाहन और स्टाफ भी कम खाद्य सुरक्षा विभाग का ज्यादातर काम फील्ड में होता है। बाजारों, होटल-रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों, डेयरी, फूड आउटलेट और पैकेज्ड फूड की दुकानों में निरीक्षण और सैंपलिंग के लिए अधिकारियों को लगातार क्षेत्र में जाना पड़ता है।
लेकिन पटना में तैनात एक अधिकारी के पास 7 जिलों का प्रभार है। पर्याप्त फील्ड स्टाफ और वाहन की कमी के बीच एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचना भी चुनौती है। इससे राजधानी में नियमित निरीक्षण की क्षमता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
पटना में लगातार होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानें, डेयरी और अन्य फूड आउटलेट बढ़ रहे हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए विभागीय संसाधनों का पर्याप्त होना जरूरी है। असिस्टेंट से लेकर आदेशपाल तक की कमी विभाग के स्थानीय कार्यालय में सिर्फ अधिकारी और फील्ड स्टाफ की ही कमी नहीं है। असिस्टेंट और आदेशपाल जैसे कर्मचारियों की भी कमी है। कार्यालय में वाई-फाई जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग को बाजारों में खाद्य पदार्थों की जांच, सैंपलिंग, शिकायतों पर कार्रवाई और सीज सामग्री की निगरानी जैसे कई काम करने होते हैं। इसके लिए फील्ड संसाधनों के साथ कार्यालयी ढांचे की भी जरूरत होती है। विभाग का दावा- नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग पर असर नहीं विभाग के अनुसार पटना जैसे बड़े शहर में नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और खाद्य नमूनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन, वाहन, कार्यालयी सुविधाओं और स्टोरेज की आवश्यकता है। हालांकि, उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विभागीय कार्य नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं। खाद्य संरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी का कहना है कि संसाधनों को लेकर कुछ आवश्यकताएं जरूर हैं, लेकिन नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और कार्रवाई की प्रक्रिया पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

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