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सहरसा के सौर बाजार थाना क्षेत्र में मक्का और अन्य कृषि उपज की खरीद के नाम पर किसानों और छोटे व्यापारियों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दर्जनों पीड़ित किसानों और व्यापारियों ने सोमवार कोसी प्रक्षेत्र के डीआईजी को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर स्थानीय पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। पीड़ितों ने मामले की जांच स्थानीय थाना पुलिस से हटाकर किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और समयबद्ध निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़ितों की ओर से दिए गए प्रतिवेदन में सौर बाजार स्थित ‘परी ट्रेडर्स’ के संचालक आशुतोष गुप्ता उर्फ वैष्णवी, उसके भाई अमितोष गुप्ता उर्फ बिट्टू गुप्ता और गोपाल प्रसाद गुप्ता पर किसानों और छोटे व्यापारियों से मक्का व अन्य कृषि उपज खरीदने के बाद भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि इसके बाद आरोपी परिवार समेत रातों-रात फरार हो गए। दो केस दर्ज, गिरफ्तारी और जांच पर उठाए सवाल प्रतिवेदन के अनुसार, काफी प्रयास और वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सौर बाजार थाने में कांड संख्या 155/26 और 159/26 दर्ज किए गए। पीड़ितों का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। किसानों का कहना है कि वे लगातार थाने और पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। जब उन्हें पुलिस की कार्रवाई से संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने खुद आरोपियों का सुराग जुटाना शुरू किया। इसी क्रम में मुख्य आरोपी आशुतोष गुप्ता के महेशखूंट, खगड़िया में होने की जानकारी मिली। किसानों ने महेशखूंट से आरोपी को पकड़ने का दावा किया पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने अपने स्तर से मुख्य आरोपी आशुतोष गुप्ता को महेशखूंट से पकड़ा और वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय पुलिस के हवाले किया। उनका आरोप है कि आरोपी को पकड़ने में किसानों की भूमिका के बावजूद बाद में गिरफ्तारी का श्रेय स्थानीय पुलिस की ओर से लिया गया। पीड़ितों ने प्रतिवेदन में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मामले में निष्पक्ष और प्रभावी जांच नहीं होने से उन्हें अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। रिमांड से लेकर मोबाइल जांच तक 28 सवाल डीआईजी को सौंपे गए प्रतिवेदन में पीड़ित किसानों और व्यापारियों ने पुलिस जांच को लेकर 28 सवाल उठाए हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद की कार्रवाई को लेकर है। पीड़ितों के अनुसार, आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ क्यों नहीं की गई, जबकि मामले में अन्य आरोपियों और लेनदेन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए पूछताछ महत्वपूर्ण हो सकती थी। प्रतिवेदन में आरोपी के पास से बरामद बताए जा रहे सैमसंग स्मार्टफोन और चार सिम कार्डों की फॉरेंसिक जांच और CDR खंगालने का मुद्दा भी उठाया गया है। पीड़ितों का सवाल है कि इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच से मामले में जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी मिल सकती थी, फिर इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई। गुजरात की मिल में एक करोड़ से अधिक के लेनदेन का भी दावा पीड़ितों ने प्रतिवेदन में गुजरात की एक मिल में आरोपी के एक करोड़ रुपए से अधिक के कथित बकाया लेनदेन का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि पुलिस को इस लेनदेन की जानकारी दी गई थी, लेकिन रकम की वसूली, भुगतान रोकने या संबंधित खातों की जांच जैसी कार्रवाई नहीं की गई। प्रतिवेदन में आरोपियों के घर से सामान हटाए जाने और CCTV फुटेज जब्त नहीं किए जाने से साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। इसके अलावा पीड़ितों ने एक पुराने आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि आरोपी के खिलाफ वर्ष 2010 में सरकारी धोखाधड़ी से जुड़ा मामला दर्ज था, लेकिन वर्तमान केस की जांच में इस पहलू को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। अन्य नामजद आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर होने का आरोप पीड़ितों का आरोप है कि मामले में नामजद अमितोष गुप्ता, गोपाल गुप्ता समेत अन्य आरोपी और कथित सहयोगी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। किसानों का कहना है कि जब तक मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच नहीं होगी, तब तक पूरे लेनदेन और कथित धोखाधड़ी की तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी। पीड़ितों ने कहा कि उनकी मेहनत की कमाई मक्का और कृषि उपज में लगी थी। भुगतान नहीं होने के कारण किसानों और छोटे कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति है। ‘सबूत हम जुटाएं और कार्रवाई का डर भी हमें दिखाया जाए’ पीड़ित किसानों ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे कई महीनों से अपनी रकम के लिए थाने और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि जब वे खुद आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने का प्रयास करते हैं तो उन्हें ही कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है। पीड़ितों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई वापस पाना और मामले की निष्पक्ष जांच कराना है। इसी वजह से उन्होंने स्थानीय स्तर की जांच के बजाय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में SIT गठित करने की मांग की है। मुख्यमंत्री से लेकर DGP तक भेजी प्रतिलिपि पीड़ित किसानों और व्यापारियों में दिनेश कुमार गुप्ता, रूपेश कुमार, मनोज कुमार, श्याम कुमार, सिंटू कुमार, चंदन साह, नवल कुमार, नीरज कुमार, अजय साह और लक्ष्मण यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं। उन्होंने DIG को दिए प्रतिवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, बिहार के DGP और ADG को भी भेजी है। पीड़ितों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर आरोपियों की भूमिका, मक्का खरीद-बिक्री, भुगतान, बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच की जाए। साथ ही लंबित मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ितों की रकम से जुड़े तथ्यों की जांच समयबद्ध तरीके से कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उच्चस्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
मक्का खरीद के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप:सहरसा में किसानों ने DIG से मांगी SIT जांच, 28 सवालों के साथ सौंपा प्रतिवेदन
