Thursday, September 24, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

Anant Chaturdashi 2026: अनंत सूत्र बांधने के बाद भूलकर भी न करें ये 3 काम, लक्ष्मी जी हो जाती हैं नाराज

[

Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा अनंत प्राप्ति के लिए की जाती है. इस दिन पूजा के बाद सुख, समृद्धि पाने और संकटों से बचने के लिए 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है. 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर भी देखा जाता है, ये अनंत सूत्र विष्णु जी के 14 स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है.

अनंत चतुर्दशी के दिन सिर्फ सूत्र बांध लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि इसे धारण करने के बाद इसकी पवित्रता और व्रत के नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी बताया गया है. आइए जानते हैं कौन से हैं वे 5 काम जो इसे पहनने के बाद नहीं करना चाहिए.

अनंत सूत्र को बार-बार न खोलें

अनंत सूत्र को सामान्य धागा समझकर बार-बार खोलना या उससे छेड़छाड़ करना उचित नहीं माना जाता. धार्मिक परंपराओं में इसे श्रद्धा और संकल्प के साथ धारण करने की बात कही गई है. इसे कितने समय तक पहनना है, इस संबंध में अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग परंपराएं मिलती हैं. कहीं इसे 14 दिन रखने की परंपरा है तो कहीं अगले वर्ष अनंत चतुर्दशी तक धारण किया जाता है. 

तन-मन से पवित्रता जरुरी

अनंत सूत्र बांधने के बाद मांसाहार और नशीले पदार्थों से दूर रहें. ब्रह्मचर्य का पालन करें. 

घर में कलह-कलेश न करें

अनंत सूत्र धारण करने के बाद घर में जानबूझकर झगड़ा, विवाद या अपशब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और परिवार की सुख-शांति की कामना से जुड़ा है. इसलिए इस दिन क्रोध और विवाद से दूर रहकर शांत वातावरण बनाए रखने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता में घर की शांति को समृद्धि से भी जोड़ा गया है.

अनंत सूत्र का अपमान न करें

अनंत सूत्र को उतारकर कहीं भी फेंक देना या उसे पैरों के नीचे आने देना उचित नहीं माना जाता. अगर किसी कारण से सूत्र टूट जाए या उसे उतारना जरूरी हो, तो उसे सम्मानपूर्वक हटाकर विसर्जित कर दें या मिट्टी में गाढ़ दें

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने का उद्देश्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है. इसलिए इस दिन दिखावे के बजाय श्रद्धा, संयम और सात्विक आचरण को महत्व देना चाहिए. लक्ष्मी को भगवान विष्णु की सहचरी माना जाता है, इसलिए विष्णु पूजा से जुड़े इस पर्व पर घर की शांति और पवित्रता बनाए रखने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

अक्टूबर 2026 के व्रत-त्योहार, देखें नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ सहित पूरे माह के पर्व का कैलेंडर

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles